मां

जिस मां के है बच्चे हम सब
उसको तुमने धुतकारा था
उस मां के दिल से पूछो
की कैसे उसने उन शब्दों को सहारा था

ख़ुद गिले में सो कर
तुमको सूखे में सुलाया था
क्या भूल गए उस कर्ज़ को
जो आज तक ना चुकाया था

कितने सपने उसने सजाए थे
एक महल सपनो का बनाया था
अब उसके सारे सपने टूट गए
जब मां से ही बच्चे रूठ गए

मां के दिल का क्या था हाल
शब्द ना कर पाएंगे उसका व्याखान

उस लड़के के दोस्त ने उसे समझाया था
की जा कर पूछो उन बच्चों से
जिन्होंने जीवन में मां का प्यार ना पाया था

जब बचपन कि याद आई
दिल के तार खनक उठे
की किस तरह मुझको पाला था
मुझ गिरते को संभाला था

अब मां का मोल वोह समझ गया
पर नज़रों से अपनी ही गिर गया

सोचा कि अब मां के सामने कैसे जयुंगा
किस तरह मुंह दिखाऊंगा

होंसला कर के मां के सामने गया वोह जब
मां के आंसू निकले तब

बेटे को गले से लगाया था
पुराना सब भुलाया था।

सिक्कों की शांति

सारे विश्व की आवाम, एक ही बात जानती है
की नोटों की गड्डियों में ही शांति है

जितने हो उतने कम है
इनसे ही मिटते सब गम है

सब सुखों का कारण है यह
आनंद का उदहारण है यह

मुझे भी यही सिखाया था
बचपन से यही पढ़ाया था

इसीलिए

कमाने के लिए, हाथों में पकड़े कटोरे थे
बड़ी मेहनत से, चंद सिक्के मैंने बटोरे थे

पर सिक्कों ने जो वादा किया था, वोह सुख दिया नहीं
और मन ने सोचा, कि शायद अभी माकूल सिक्कों को इकठ्ठा किया नहीं

मन की तृष्णा क्यों यह मानती नहीं
की दुनिया भर के सिक्कों में भी शांति नहीं

गलती हमारी नहीं दरअसल, सिखाने वालों ने हमें गलत ही सिखाया
सिक्के ही सुख का कारण है, यही बतलाया

मैं तो जान गया हूं अब, पर ना जाने यह आवाम कब यह समझ पाएगी
की जीवन की सच्चाई, इन सिक्कों की पकड़ में कभी नहीं आएगी।

04.10.2012