मेरी ही गलती थी

मेरी ही गलती थी

तुम्हे पीछे से बुलाना
जब सामने खड़ा था तमाशाई ज़माना

मेरी ही गलती थी

यूं बिना बताएं तेरी चोखट पर आना
आते जातों को अपनी मोहब्बत के किस्से सुनना

मेरी ही गलती थी

कुछ ना कुछ बना लेते थे तुमसे मिलने का बहाना
तुम आ जाती थी और मेरा भूल जाना

मेरी ही गलती थी

तेरी वफ़ा को मैं करता हूं सजदे
की मेरी गलतियों के बावजूद भी, ना ठुकरा कर सीने से लगाना

जबकि, मेरी ही गलती थी

तेरी सादगी, तेरी मैकशी ने असल मोहब्बत सीखा दी मुझे
की गर इश्क़ है तो आशिक़ की हर गलती को कैसे नज़रअंदाज़ कर जाना

जबकि, मेरी ही गलती थी

कुछ आंसू बहा कर

कुछ आंसू बहा कर, तुम सचे बन गए
अब रो लिए है हम, यह कह कर तन गए

पर तुम्हे अपनी गलती का तो एहसास नहीं
कहां बेच आए हो, जो इतनी सी शर्म भी तुम्हारे पास नहीं

और फिर कहते हो की सब नोर्मल करदो
अब कभी ना सुनाना इस भूल का किस्सा, इसे दफ़न करदो

पर तुम्हे ना कोई एहसास है, और ना ही कोई बदलाव है
कल भी यही करोगे, बस कब? यही सवाल है

तुम कितने स्वार्थ से भर गए हो, की तुम्हे अपनो का दुख दिखता नहीं
यह तो खून के रिश्तों की पकड़ है, वरना इस तूफ़ान में कोई टिकता नहीं

ना करो मिट्टी वोह साल, वोह दिन जो सिंचन में लगाएं है
मत छोड़ो इस कश्ती को, किनारे से बहुत दूर हम आएं है

कहना हमारा फ़र्ज़ है, पर करना तुम्हारी चाह है
फूल बिछा रहे थे हम क़दमों में, क्यूंकि कांटो भरी यह राह है

समझ करो ऐ प्यारे, अपनी भूल सुधारो
अपने नहीं मिलेंगे कहीं, चाहे लोग इकठ्ठे करलो हज़ारों।