आगे क्या करना है, आगे क्या होना है
कुछ पता नही
पता है तो बस इतना, की जीना है
क्यों और कैसे, अभी उसकी भी कोई ख़बर नहीं
मरना जब विकल्प ही नहीं है
तब तो जीना ही होगा
क्या करू ऐसा की जिंदगी सार्थक लगे
सिर्फ़ खाना कमाना तो इसका अर्थ नहीं हो सकता
कहां ढूंढू मैं इसका मतलब, किससे पूछ के आऊ
चलूं पुराने रास्तों पर या कोई नई डगर बनाऊं
किससे पूछ के आऊ
Category: Poems
आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है
पत्थर दिल हो जा ए मुसाफ़िर
जीना यहीं है
जग ने कहीं है
शायद सही है
जीना यहीं है
जग ने कहीं है
शायद सही है
आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है
ना कोई है अपना
ना कोई पराया
ठोकरों ने जग की, है यही समझाया
सूने पलो के कांटे अब चुभते नहीं है
आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है
ज़ख्मों का क्या है विशाल
वोह तो भर ही जाएंगे
थोड़ा और मजबूत, तुम्हें कर ही जाएंगे
ज़ख्म पुराने, अब दुखते नहीं है
आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है
उम्र का तजुर्बा यही है विशाल
मुरझाने के बाद, फूल खिलते नहीं है
आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

