वक़्त आने की देरी है

वक़्त आने की देरी है

सोचा तो यह था कि मैं ही मैं हो जाऊंगा
अकेले होने की परवाह नहीं थी मुझे
जानता था कि इक दिन मैं कारवां हो जाऊंगा

बस, वक़्त आने की देरी है

शायद वक़्त वक़्त की बात है
उस वक़्त हम भी जवां थे और वक़्त भी जवां था
मेरे मन का होंसला यूहीं नहीं बना
बन्दा बन्दा मेरी काबिलियत का गवाह था

यह तो नामुराद शरीर है
जिसने हमारा साथ ना दिया
लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट अभी थमी भी ना थी
की इसने हमें गिरा भी दिया

मौत के बिस्तर पर समय ने
एक बात दिमाग़ में भर भर के डाली
की कुछ भी करलो जाना होगा
और हाथ होंगे बिल्कुल खाली

जाते हुए, जेबों में भर सकु
ऐसा धन जुटाना है मुझे
इस बार का ही क्यूं सोचूं
अगली बार भी तो आना है मुझे

शायद यह दिले तमन्ना तब पूरी हो जाए
तब का इंतजार रहेगा
इस बार चुके तो कोई गिला नहीं
अगली बार हर कोई हमें ही शानदार कहेगा

कुछ आंसू बहा कर

कुछ आंसू बहा कर, तुम सचे बन गए
अब रो लिए है हम, यह कह कर तन गए

पर तुम्हे अपनी गलती का तो एहसास नहीं
कहां बेच आए हो, जो इतनी सी शर्म भी तुम्हारे पास नहीं

और फिर कहते हो की सब नोर्मल करदो
अब कभी ना सुनाना इस भूल का किस्सा, इसे दफ़न करदो

पर तुम्हे ना कोई एहसास है, और ना ही कोई बदलाव है
कल भी यही करोगे, बस कब? यही सवाल है

तुम कितने स्वार्थ से भर गए हो, की तुम्हे अपनो का दुख दिखता नहीं
यह तो खून के रिश्तों की पकड़ है, वरना इस तूफ़ान में कोई टिकता नहीं

ना करो मिट्टी वोह साल, वोह दिन जो सिंचन में लगाएं है
मत छोड़ो इस कश्ती को, किनारे से बहुत दूर हम आएं है

कहना हमारा फ़र्ज़ है, पर करना तुम्हारी चाह है
फूल बिछा रहे थे हम क़दमों में, क्यूंकि कांटो भरी यह राह है

समझ करो ऐ प्यारे, अपनी भूल सुधारो
अपने नहीं मिलेंगे कहीं, चाहे लोग इकठ्ठे करलो हज़ारों।