बीता समय, अच्छा था या बुरा, कुछ याद नहीं । क्या वोह लम्हे बरकत के थे या हरज़े के, कुछ याद नहीं ।। याद है तो बस इतना, की जिंदगी थी और हम जिंदा थे । क्यों और कैसे, उतना सब तो अब याद नहीं ।। याद करके करना भी क्या है ओ शायर, समय तो बह कर गुज़र गया । आज खड़ा है सामने हाथ बढ़ाए, की चलो कुछ नई यादें बनाएं ।। अब कोशिश हो की ऐसे जिए, की लम्हा-दर-लम्हा याद रहे । सजाए कुछ ऐसा यादों के आशियाने को, की हमारे जाने के बाद भी वोह आबाद रहे ।।
Category: Poems
मेरे इशारों पर
ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर
कभी झूमती, कभी नाचती
साज़ की बजती तारों पर
ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर
कभी है हंसती, कभी है रोती
अपने खुद के विचारों पर
ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर
कभी दमकती, कभी चमकती
अपने खड़े किए मीनारों पर
ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर
कभी है जलती, कभी है बुझती
व्यंग कसती अंधकारों पर
ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर
कभी है चड़ती, कभी उतरती
आ कर रुकती, किनारों पर
ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर
कभी है खिलती, कभी मुरझाती
छा जाती है बहारों पर
ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर
कभी बरसती, कभी गरजती
खुशियां बिखेरे हज़ारों पर
ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर
कभी सिमटती, कभी बिखरती
बनती तस्वीर दीवारों पर
ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर।
01.04.05

