आगे क्या करना है

आगे क्या करना है, आगे क्या होना है
कुछ पता नही

पता है तो बस इतना, की जीना है
क्यों और कैसे, अभी उसकी भी कोई ख़बर नहीं

मरना जब विकल्प ही नहीं है
तब तो जीना ही होगा

क्या करू ऐसा की जिंदगी सार्थक लगे
सिर्फ़ खाना कमाना तो इसका अर्थ नहीं हो सकता

कहां ढूंढू मैं इसका मतलब, किससे पूछ के आऊ
चलूं पुराने रास्तों पर या कोई नई डगर बनाऊं

किससे पूछ के आऊ

ना जाने

सोचता हुं कि निकलु मन की कैद से
अरसा हो गया है इस कैद में

कितने सूरज चड़ के उतर गए
पर मेरी आज़ादी कि कोई किरण मेरे दरवाज़े तक ना पहुंची

आसान नहीं है, इन दीवारों को तोड़ पाना
समय और मेहनत दोनों की ही जरूरत है

ना जाने कब मैं की मैं को छोड़ पाऊंगा
ना जाने कब इन दीवारों को तोड़ पाऊंगा।