आगे क्या करना है, आगे क्या होना है
कुछ पता नही
पता है तो बस इतना, की जीना है
क्यों और कैसे, अभी उसकी भी कोई ख़बर नहीं
मरना जब विकल्प ही नहीं है
तब तो जीना ही होगा
क्या करू ऐसा की जिंदगी सार्थक लगे
सिर्फ़ खाना कमाना तो इसका अर्थ नहीं हो सकता
कहां ढूंढू मैं इसका मतलब, किससे पूछ के आऊ
चलूं पुराने रास्तों पर या कोई नई डगर बनाऊं
किससे पूछ के आऊ
Category: Poems
दिल का हाल
है दिल का यह हाल, कहां से शुरू करूं
टाले टाला ना गया
तुमसे मिलने का मन
जाले में फंस ही गया
तड़पे मेरा यह तन
इक झलक तेरी सूरत की
देखने को मैं तरसा बड़ा
आंखों को रोका था बहुत
पर पानी बरसा बड़ा
कब होगी मुलाकात
कब होगी तू रूबरू
है दिल का यह हाल, कहां से शुरू करूं
चंदा की चांदनी
अब जलाती है मुझे
रात की खामोशी
बिरह गीत सुनाती है मुझे
दिन भी वैसा ही है
जैसी रात है
कैसे जीतेंगे तुझे हम
किस्मत ने ही दी मात है
तुझसे मिलने के लिए
और क्या यत्न करू
है दिल का यह हाल, कहां से शुरू करूं

