तेरे मिलने की उम्मीद

तेरे मिलने की उम्मीद से, दिल में सकून है
सब फीका है अब तो, तुझे मिलने का जुनून है

तेरे दीदार की चाहत का असर कुछ ऐसा है
की ज़िन्दगी ने सांसों कि मोहताजगी छोड़ दी है

हर घड़ी जो तेरी याद रहे, वही दौलत-ए-ज़िन्दगी है
चंद सिक्को के खातिर जो करते थे, वोह चाकरी छोड़ दी है

तुझसे मिलने की आरज़ू में, कटता है अब वक़्त मेरा
ख़ुदा की जो करते थे, वोह बंदगी छोड़ दी है।

जादू की नगरी

यह दुनिया है उल्फत
जादू की नगरी

यहां नए है नज़ारे
हर एक नई है डगरी

यह काला है जादू
ना इसका कोई तोड़

यह सर चड़ के बोले
ना जाया जाए भी छोड़

यह पागल बना के
नचाए अपने इशारे

यहां आके हमने सीखा
क्या हमारे, क्या तुम्हारे

कहते जग को कविता
पर किस ने रची है

यह किसने रची है

पर जैसी भी है
यहां जी लेते है लोग

जब कुछ मिलकर बिछड़ता
कर लेते है शोक

कुछ अपने है, कुछ पराए भी
जो खिले थे कभी वोह मुरझाए भी

जाना सब को है यहां से
कहते चलती चक्री है

दुनिया जादू की नगरी है