मेरी नाकामयाबीयां बस मेरी ही है
मैं ही हूं जो की हंसता रहा, मुस्कुराता रहा
यह कह के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
जो भी यह बिखरी चीजे है, यह सब मेरी है
मैं ही था जो बेपरवाह होकर इनको गिरता गया
यह सोच के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
मैं अपने आप को कहता रहा की संभलना क्यों है
थोड़ी देर और इसी नशे में रहने दो खुद को
क्योंकि अभी तो वक्त बहुत बाकी है
मुझे सच में यकीन था कि बहुत वक्त है पास मेरे
उन कीमती पलो के सिक्के को मैं लुटाता गया
यह सोच के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
आज मेरे हाथों मैं वक्त की लकीरे हैं और कुछ भी नही
सब आगे बड़ गए, मेरे पास खड़ा कोई भी नहीं
अब लगता है की निकल गया सारा वक्त, कहां बचा कुछ बाकी है
मेरी नाकामयाबीयां बस मेरी ही है
मैं ही हूं जो की हंसता रहा, मुस्कुराता रहा
यह कह के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
Category: Poems
राधा खेली रंग
राधा रंग रंग खेली फ़ोहर री
मेरी अलबेली सरकार री
मेरी अलबेली सरकार री
आज होली का त्योहार री
राधा रंग रंग खेली फ़ोहर री
कहीं ब्रज में वोह फूलों से खेले
कहीं लठ की मारे मार री
मेरी अलबेली सरकार री
राधा रंग रंग खेली फ़ोहर री
गगन रंगा है, रंग गई धरती
जन जन का करती उद्धार री
मेरी अलबेली सरकार री
राधा रंग रंग खेली फ़ोहर री
मंगल गान चहो दिसा में गूंजे
आनंद की झंकार री
मेरी अलबेली सरकार री
राधा रंग रंग खेली फ़ोहर री
तन रंग दे, मन रंग दे आज
खुले है मन मंदिर के द्वार री
मेरी अलबेली सरकार री
राधा रंग रंग खेली फ़ोहर री

