जिंदगी सार्थक कर दे ए मौला,
मुझे सलीके से जीने का मौका दे।
नई तय कर मेरे जीवन की ऊंचाइयां,
जिंदगी में नई तमनाओ का झोंका दे।
बारीशे कर इल्म-ओ-हुनर की मुझ पर,
मुझे नई बुलंदियों पर पहुंचा दे।
मैं ऊपर उठू तेरे रहम-ओ-करम से मेरे मौला,
मेरे जीवन को जन्नत बना दे।
हटा मेरे सर से बोझ सभी फिकरों का,
मुझे सकून से जीना का सलीका दे।
और मिटा दे मेरे जेहन से, जो भी बुरा सीखा है मैंने,
मुझे प्यार के, इबादत के, दो लफ्ज़ सीखा दे।
मैं खोजू तुझ को और तुझी से ही मिल जायूँ,
यही मेरी जिंदगी की मंजिल तू बना दे।
इमदाद कर तू यही मेरे मौला,
मैं मिल सकूं तुझ से, मुझे इतना काबिल तू बना दे।
मुझे तुझसे(खुदसे) मिलने का मौका दे।।
Category: Poems
मूर्ति पुज के राम मिले तो
मूर्ति पुज के राम मिले तो, मै पुजू पहाड़
राम तेरा तेरे भीतर छुपा है, उसको ले पहचान
तुझ पर कृपा करता है वोह, कितना दीन दयाल
दुख में जब सब छोड़ के जाते, वोह रहता तेरे पास
सुख दुख में वोह साथ है तेरे, रख उस पर ही आस
दुख मैं भी तू निडर रहना, ना सुख की करना आस
राम का रिश्ता तुझ से वैसा, जैसे पानी संग है प्यास
बाहर की आंखें बंद कर ले, भीतर आंखें खोल
भीतर समाए राम के, संग संग तू डोल
फिर तू समझ जाएगा प्यारे, कहां राम का वास
मूर्ति पुज के राम मिले तो, मै पुजू पहाड़ ।

