दिल का हाल

है दिल का यह हाल, कहां से शुरू करूं

टाले टाला ना गया
तुमसे मिलने का मन

जाले में फंस ही गया
तड़पे मेरा यह तन

इक झलक तेरी सूरत की
देखने को मैं तरसा बड़ा

आंखों को रोका था बहुत
पर पानी बरसा बड़ा

कब होगी मुलाकात
कब होगी तू रूबरू

है दिल का यह हाल, कहां से शुरू करूं

चंदा की चांदनी
अब जलाती है मुझे

रात की खामोशी
बिरह गीत सुनाती है मुझे

दिन भी वैसा ही है
जैसी रात है

कैसे जीतेंगे तुझे हम
किस्मत ने ही दी मात है

तुझसे मिलने के लिए
और क्या यत्न करू

है दिल का यह हाल, कहां से शुरू करूं

मेरी ही गलती थी

मेरी ही गलती थी

तुम्हे पीछे से बुलाना
जब सामने खड़ा था तमाशाई ज़माना

मेरी ही गलती थी

यूं बिना बताएं तेरी चोखट पर आना
आते जातों को अपनी मोहब्बत के किस्से सुनना

मेरी ही गलती थी

कुछ ना कुछ बना लेते थे तुमसे मिलने का बहाना
तुम आ जाती थी और मेरा भूल जाना

मेरी ही गलती थी

तेरी वफ़ा को मैं करता हूं सजदे
की मेरी गलतियों के बावजूद भी, ना ठुकरा कर सीने से लगाना

जबकि, मेरी ही गलती थी

तेरी सादगी, तेरी मैकशी ने असल मोहब्बत सीखा दी मुझे
की गर इश्क़ है तो आशिक़ की हर गलती को कैसे नज़रअंदाज़ कर जाना

जबकि, मेरी ही गलती थी