मेरी नाकामयाबीयां बस मेरी ही है
मैं ही हूं जो की हंसता रहा, मुस्कुराता रहा
यह कह के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
जो भी यह बिखरी चीजे है, यह सब मेरी है
मैं ही था जो बेपरवाह होकर इनको गिरता गया
यह सोच के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
मैं अपने आप को कहता रहा की संभलना क्यों है
थोड़ी देर और इसी नशे में रहने दो खुद को
क्योंकि अभी तो वक्त बहुत बाकी है
मुझे सच में यकीन था कि बहुत वक्त है पास मेरे
उन कीमती पलो के सिक्के को मैं लुटाता गया
यह सोच के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
आज मेरे हाथों मैं वक्त की लकीरे हैं और कुछ भी नही
सब आगे बड़ गए, मेरे पास खड़ा कोई भी नहीं
अब लगता है की निकल गया सारा वक्त, कहां बचा कुछ बाकी है
मेरी नाकामयाबीयां बस मेरी ही है
मैं ही हूं जो की हंसता रहा, मुस्कुराता रहा
यह कह के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
Category: Poems
फिर भी जी रहे हम है
फिर भी जी रहे हम है… हम है… हम है…
आज कल उदासी का मौसम है
दिन रात कुछ ना कुछ गम है
फिर भी जी रहे हम है… हम है… हम है…
ज़िन्दगी में आज तक जो बटोरा
देखो वोह कितना कम है
फिर भी जी रहे हम है… हम है… हम है…
रौनक चेहरे की उड़ सी गई है
मन हुआ है जैसे जलती चिलम है
फिर भी जी रहे हम है… हम है… हम है…
खरीदने गए थे हम खुशियों को
पर आज तक मिले सितम है
फिर भी जी रहे हम है… हम है… हम है…
घर जो था वोह दीवारें बन है गई
हर रिश्ते में कोई ना कोई उलझन है
फिर भी जी रहे हम है… हम है… हम है…
इन रोतो को हसादे कोई
इससे पहले कि निकले दम है
फिर भी जी रहे हम है… हम है… हम है…

