जरूर आएगा

बहुत इंतजार किया हमने, उम्मीदों भरी आंखों से
पर कुछ ना मिला हमें, उन दिलासो भरी बातों से

वक्त की मरहम भरी उंगलियां ज़ख्मो को सहलाती थी
और फिर से वही ज़िन्दगी शुरू हो जाती थी

पर मन में यह आस थी कि सब ठीक हो जाएगा
आज अगर दुख है तो सुख भी जरूर आएगा|

ना जाने

सोचता हुं कि निकलु मन की कैद से
अरसा हो गया है इस कैद में

कितने सूरज चड़ के उतर गए
पर मेरी आज़ादी कि कोई किरण मेरे दरवाज़े तक ना पहुंची

आसान नहीं है, इन दीवारों को तोड़ पाना
समय और मेहनत दोनों की ही जरूरत है

ना जाने कब मैं की मैं को छोड़ पाऊंगा
ना जाने कब इन दीवारों को तोड़ पाऊंगा।