दारू

गमो की लहर दारू तोड़ सकती है
टूटे दिलो के तार दारू जोड़ सकती है

दरिया को हाथो से ही मोड़ सकती है
दुश्मनो के इरादों को यह झंझोड़ सकती है

टूटे हुए रिश्तों को भी यह जोड़ सकती है
आते हुए तूफानों का रुख मोड़ सकती है

मन की आंखो को यह खोल सकती है
ध्यान से सुनो बोतल बोल सकती है

क्या नही कर सकती दारू
कोई पूछे
तो कहूं
इंसान में इंसानियत डाल सकती है
हया, डर, भरम निकाल सकती है

और जो पूछो
तो बताऊं मैं तुम्हें
की कैसे इंसान को फरिश्ता बना सकती है
मज़बूत हर रिश्ता यह बना सकती है

रिश्तों की समझ

रिश्तों की तुम्हें समझ नहीं, अपनों की पहचान नहीं
घर की तुम्हें कद्र नहीं, घरवालों का मान नहीं

मन की ग़ुलाम हो तुम, ज़िम्मेदारी से अनजान हो तुम
न जाने किस ख़ुशी को ढूंढ रही हो, अपने आप से ही अनजान हो तुम

इसीलिए परेशान होती हो और परेशान करती हो तुम
मन को ना जाने किन किन विचारों से भरती हो तुम

खुश नसीब हो, की रखने वालो ने रखा है
बड़ी मुश्किल से इन्होंने अपने मन को किया पक्का है

अब इम्तिहान ना लो इनका, सब्र का सब्र भी टूट जाता है
इस खामोशी को इनकी कमज़ोरी ना समझो, यह तूफ़ान से पहले का सन्नाटा है

अल्लाह के बन्दों को जिस ने भी कभी छेड़ा, वोह सरे-आम चौराहों पर लुट जाते है
अहम् टूट जाते है, अहम् टूट जाते है