कोई गिला नहीं

ना ही कोई गिला है मुझे, ना ही कोई शिकायत है
बस कट रही है यह ज़िन्दगी, तेरी ही इनायत है

तेरा ही तो दिया सब कुछ है, तुझ पे ही सब कुर्बान है
मां बाप की उधारी यह शरीर है, और तेरी उधारी यह जान है

कुछ अपना नहीं, कुछ पराया नहीं
कुछ मैंने खोया नहीं, और कुछ नया पाया नहीं

मैं हर धड़ी ही पूरा था, मैं हर घड़ी ही पूर्ण हूं
मैं हर घड़ी ही तु था, तु होकर ही सम्पूर्ण हूं।

काली रात तो बाद स्वेर

छड़ ओह कमलेया विशाला
जग दे सारे फेर

किस पासे दिया करिए
जद सारे पासे हनेर

जे कोई इस चो निकल लेया
ता उस मालिक दी मेहर

मन ना होला कर वे चंदरेया
आऊगी काली रात तो बाद स्वेर।

15.12.2012