तुम दोस्त हो कर, मेरी किसी बात पर मुस्कुराते नहीं।
मैं आवाज़ लगाता रह जाता हूं, पर तुम लोट कर आते नहीं।।
यह कैसी दोस्ती है, जिसमें तुम मेरे साथ वक्त बिताते नहीं।
कहां हो, कैसे हो, क्या कर रहें हो, पूछो तो कुछ बताते नहीं।।
कभी कभी तो यूं लगता है, की अब वोह पुरानी वाली बात रही नहीं।
पहले घंटों होती थी एक के बढ़कर एक फिजूल की बातें, अब कहते हो की करने को कोई बात नहीं।।
क्या करते रहते हो आज कल, क्या है जिसमे इतना खो गए हो तुम।
लगता है जैसे जिंदगी की परेशानियों से, कुछ ज्यादा ही मायुस हो गए हो तुम।।
बाहर आयो इस उलझावे से, देखो मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।
मिल जाए मुझे वही पुराना दोस्त, दुआ यह बार बार कर रहा हूं।।
मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।।
Category: Poems
दारू
गमो की लहर दारू तोड़ सकती है
टूटे दिलो के तार दारू जोड़ सकती है
दरिया को हाथो से ही मोड़ सकती है
दुश्मनो के इरादों को यह झंझोड़ सकती है
टूटे हुए रिश्तों को भी यह जोड़ सकती है
आते हुए तूफानों का रुख मोड़ सकती है
मन की आंखो को यह खोल सकती है
ध्यान से सुनो बोतल बोल सकती है
क्या नही कर सकती दारू
कोई पूछे
तो कहूं
इंसान में इंसानियत डाल सकती है
हया, डर, भरम निकाल सकती है
और जो पूछो
तो बताऊं मैं तुम्हें
की कैसे इंसान को फरिश्ता बना सकती है
मज़बूत हर रिश्ता यह बना सकती है

