हम है आज़ाद परिंदे

हर गम से तु
मज़बूरी से
आज़ादी दे

ओ मौला
मुझे आज़ाद
कर दे

मेरे पंखों को
खुलने की
जगह दे

इतनी की
सूरज को भी
हम छुपा दे

ओ मौला
मुझे आज़ाद
कर दे

कुछ पाने कि
हर ख्वाहिश ही
फ़ना कर दे

तेरे इश्क़ की
चाहत से ही
मुझे भर दे

ओ मौला
मुझे आज़ाद
कर दे

मेरे कन कन को
आज़ादी से
ऐसे भर दे

की सांस-सांस मेरी बोले
हम है
आज़ाद परिंदे

हम है
आज़ाद परिंदे

उड़ने की तमन्ना

उड़ने की तमन्ना और संभल कर चलना
यह एक ही सिक्के के दो हिस्से है

नहीं तो जनाब, खोलो किताब
उन जैसे लोगों के भरे पड़े किस्से है

की वोह लोग ऐसे गिरे
की गिरने की आवाज़ तक ना हुई

राख हुई उनकी उम्मीदें
और सपने जल गए जैसे हो रूई

दोनों ही पंख ग़र सबल हों
तब ही उड़ान भर सकते हो

हवा को शर्मिंदा
और क्षितिज का दीदार कर सकते हो

ग़र समझ गए तो खोलो दोनों पंख
और उड़ान भरो

छा जाओ पूरी कायनात पर
और अपनी मुठ्ठी में आसमान करो।

13.02.2013