आगे क्या करना है

आगे क्या करना है, आगे क्या होना है
कुछ पता नही

पता है तो बस इतना, की जीना है
क्यों और कैसे, अभी उसकी भी कोई ख़बर नहीं

मरना जब विकल्प ही नहीं है
तब तो जीना ही होगा

क्या करू ऐसा की जिंदगी सार्थक लगे
सिर्फ़ खाना कमाना तो इसका अर्थ नहीं हो सकता

कहां ढूंढू मैं इसका मतलब, किससे पूछ के आऊ
चलूं पुराने रास्तों पर या कोई नई डगर बनाऊं

किससे पूछ के आऊ

ना देख पाए ज़िन्दगी

नज़र अंदाज़ कर के
बख़ूबी चल रही थी ज़िन्दगी
जिस दिन रूबरू हुए
उस दिन घबरा गए हम

इतना कुछ बीत रहा था
उसके साथ
की हालत उसकी देख के
शर्मा गए हम

कुछ देर भी यह नज़ारा
देख ना सके
मन की चुभन के चलते
नज़रे छुपा गए हम।