मैं मरना नहीं चाहता


मैं मरना नहीं चाहता, मुझे मौत का डर है

माना कि पथ कांटो से भरा है
दुख ही दुख है और सुख ज़रा है
पर फिर भी मुझे प्यारा यह सफ़र है

मैं मरना नहीं चाहता, मुझे मौत का डर है

कांटो की चुभन फूलों की चाहत बढ़ाए
और उठते कदम थोड़ा आगे लेजाएं
चलना है मुझे चाहे मुश्किल यह डगर है

मैं मरना नहीं चाहता, मुझे मौत का डर है

और बढ़ने को आगे कोई थकान नहीं है
माना कि चहरे पर अभी मुस्कान नहीं है
ख़ोज रहा हूं कि खुशी किधर है

मैं मरना नहीं चाहता, मुझे मौत का डर है

हालांकि मेरे लिए खुशी इतनी जरूरी नहीं है
कट रही है, हालत इतनी बुरी नहीं है
मुझे अपनी नहीं अपनों की फिकर है

मैं मरना नहीं चाहता, मुझे मौत का डर है

पर जाना तो होगा यहां कौन रहा है
बेमतलबी है ज़िन्दगी, हज़ारों ने कहां है
और हर इलाज़ इसके आगे बेअसर है

मैं मरना नहीं चाहता, मुझे मौत का डर है

मुश्किल बड़ा है पर सच यही है
जाना ही होगा वोह सुनती नहीं है
मौत के सामने चलती ना अगर मगर है

मैं मरना नहीं चाहता, मुझे मौत का डर है

मन को संभालो यह दे के दिलासा
की चाहे वक़्त मिला है हमें ज़रा सा
पर ना होने से, तो होना बेहतर है

तो अब कभी भी आए
मुझे मौत का क्या डर है

12.11.2013

मेरी मां

मेरी सजावत से क्या
मेरी सजावत भी तुम हो
मेरी इबादत भी तुम हो

तुम ही हो जन्नत के नज़ारे
तुम ही हो दिल जिसे पुकारे

तुम ही हो वोह न्यारी मूरत
तुम ही हो सबसे ख़ूबसूरत

करुणा, दया, प्यार और ममता तुम से झलकती है
तुम्हे याद करते हुए, पलक तक ना झपकती है

तुम उन ऋषियों की तपस्या हो, जो प्रभु को पाना चाहते है
तुम समंदर का वोह क्षितिज हो, जिसमें सूरज डूब जाना चाहते है

तुम वोह हो जिसमें मेरा मन, हर पल ही पल सुख पाता है
तुम हो मेरी मां, जिसे देखकर मेरा दिल मुस्कुराता है।