दारू

गमो की लहर दारू तोड़ सकती है
टूटे दिलो के तार दारू जोड़ सकती है

दरिया को हाथो से ही मोड़ सकती है
दुश्मनो के इरादों को यह झंझोड़ सकती है

टूटे हुए रिश्तों को भी यह जोड़ सकती है
आते हुए तूफानों का रुख मोड़ सकती है

मन की आंखो को यह खोल सकती है
ध्यान से सुनो बोतल बोल सकती है

क्या नही कर सकती दारू
कोई पूछे
तो कहूं
इंसान में इंसानियत डाल सकती है
हया, डर, भरम निकाल सकती है

और जो पूछो
तो बताऊं मैं तुम्हें
की कैसे इंसान को फरिश्ता बना सकती है
मज़बूत हर रिश्ता यह बना सकती है

सिसकी

सिसकी यह मन, कुछ यूं है भरे
यादों को तेरी जब, याद करे

लम्हें जो काटे थे, साथ हमने
उन यादों के ज़ख्म, फिर हुए हैं हरे

दिल की ख्वाहिश, वोह जाने बिना ही कहें
वोह पथ पर ना जाने, कहां छूट गए

वोह पत्थर हुए, हम हुए है पानी
पत्थर कैसे की, जो पानी पे तरे