प्रभु जी तुम निष्ठुर कठोर

प्रभु जी तुम निष्ठुर कठोर

कुछ तो करो बदलाव रे
गहरे मेरे घाव रे
फंस गया हूं मैं, ना है कोई छोर

प्रभु जी तुम निष्ठुर कठोर

अब बातों पे, यकीन नहीं तेरी
दिल में चले तेरे हेरा फेरी
ज़माने भर में मचायुंगा, मैं इस बात का शोर

की प्रभु जी तुम निष्ठुर कठोर

अपना हमको तुम ने बनाया
थोड़ा अपना जलवा दिखाया
फिर क्यों आज ना है कोई ठोर

प्रभु जी तुम निष्ठुर कठोर

दुख में मैंने अन जल है त्यागा
मत तोड़ो मेरे प्रेम का धागा
तुम हो पतंग और मैं हुं डोर

प्रभु जी तुम निष्ठुर कठोर

मुझसे छुटे तो कहां जायोगे
मेरे बिन क्या रह पायोगे
चाहे लगा लो पूरा जोर

प्रभु जी ना बनो निष्ठुर कठोर

गुज़ारिश

जिंदगी सार्थक कर दे ए मौला,
मुझे सलीके से जीने का मौका दे।


नई तय कर मेरे जीवन की ऊंचाइयां,
जिंदगी में नई तमनाओ का झोंका दे।


बारीशे कर इल्म-ओ-हुनर की मुझ पर,
मुझे नई बुलंदियों पर पहुंचा दे।


मैं ऊपर उठू तेरे रहम-ओ-करम से मेरे मौला,
मेरे जीवन को जन्नत बना दे।


हटा मेरे सर से बोझ सभी फिकरों का,
मुझे सकून से जीना का सलीका दे।


और मिटा दे मेरे जेहन से, जो भी बुरा सीखा है मैंने,
मुझे प्यार के, इबादत के, दो लफ्ज़ सीखा दे।


मैं खोजू तुझ को और तुझी से ही मिल जायूँ,
यही मेरी जिंदगी की मंजिल तू बना दे।


इमदाद कर तू यही मेरे मौला,
मैं मिल सकूं तुझ से, मुझे इतना काबिल तू बना दे।


मुझे तुझसे(खुदसे) मिलने का मौका दे।।