मैं बिक गया बाज़ार में
मेरी आबरु कोई ले गया
मेरी आबरु कोई ले गया
मंदिर गया में पुकार में
मेरी जुस्तजु कोई ले गया
मैं बिक गया बाज़ार में
मेरी आबरु कोई ले गया
मैंने सोचा कतल-ए-आम हो
सब मर मिटे, जिम्मेवार जो
हथियार लिया इन हाथों में
मेरी मासूमियत कोई ले गया
मैं बिक गया बाज़ार में
मेरी आबरु कोई के गया

