शादी के बाद का आना जाना

शादी के बाद का आना जाना
हर शनि इतवार रिश्तेदारों के घर खाना

साड़ी पहनना और मेकअप करना, मुझको तो लगती सजा़ है
मेरी तो जीन्स और जैकेट, पहनने की रजा़ है
यह कहते है यह सब पहन कर, मेरी नाक ना कटवाना

शादी के बाद का आना जाना
हर शनि इतवार रिश्तेदारों के घर खाना

सात से दस, फ़िल्म वीर का शो है
कोनो वाली सीट है, और आखरी रो है
मेरी मानो तो लगादो, बीमार होने का बहाना

शादी के बाद का आना जाना
हर शनि इतवार रिश्तेदारों के घर खाना

मैं तो कहती हूं, जाने की फ़ीस तय कर को
फिर तो चाहे इस लिस्ट में, दो चार नाम और भर लो
यह कहते ऐसा ना सोच, तेरी फैमिली ने अभी है बुलाना

शादी के बाद का आना जाना
हर शनि इतवार रिश्तेदारों के घर खाना

जिस घर में भी जाओ, वहां इंडियन खाना ही खिलाते है
ना कोई मोकटेल और ना कोई कॉकटेल, बस नींबू पानी पिलाते है
मैं चलती हुं तुम्हारे साथ, अगर वहां अलग से चाइनीज है मंगवाना

शादी के बाद का आना जाना
हर शनि इतवार रिश्तेदारों के घर खाना।

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

पत्थर दिल हो जा ए मुसाफ़िर
जीना यहीं है
जग ने कहीं है
शायद सही है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

ना कोई है अपना
ना कोई पराया
ठोकरों ने जग की, है यही समझाया
सूने पलो के कांटे अब चुभते नहीं है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

ज़ख्मों का क्या है विशाल
वोह तो भर ही जाएंगे
थोड़ा और मजबूत, तुम्हें कर ही जाएंगे
ज़ख्म पुराने, अब दुखते नहीं है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

उम्र का तजुर्बा यही है विशाल
मुरझाने के बाद, फूल खिलते नहीं है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है