आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

पत्थर दिल हो जा ए मुसाफ़िर
जीना यहीं है
जग ने कहीं है
शायद सही है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

ना कोई है अपना
ना कोई पराया
ठोकरों ने जग की, है यही समझाया
सूने पलो के कांटे अब चुभते नहीं है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

ज़ख्मों का क्या है विशाल
वोह तो भर ही जाएंगे
थोड़ा और मजबूत, तुम्हें कर ही जाएंगे
ज़ख्म पुराने, अब दुखते नहीं है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

उम्र का तजुर्बा यही है विशाल
मुरझाने के बाद, फूल खिलते नहीं है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

मुझे आगे बढ़ते जाना है

मुझे आगे बढ़ते जाना है

मेहनत कर कुछ किया हमने
इसी मेहनत के दम पर लिए है सपने

कुछ कर अब मुझको दिखाना है
उस चमकते सूरज को पाना है

जलता है तन यहां बहुत मेरा
पर मुझे इसे तपाना है

सोना है अभी पास मेरे
इस तपा कर कुंदन बनाना है

मुझे आगे बढ़ते जाना है।