मैं जानता हूं

मझधार में फंसा हूं मैं, मैं जानता हूं
अपनी गलतियों की वजह से यहां हूं मैं, मैं जानता हूं

जमाने भर से लड़ा हूं मैं, मैं जानता हूं
कोरे अहम से भरा हूं मैं, मैं जानता हूं

औरों के गम में मुस्कुराया हूं मैं, मैं जानता हूं
ज़ुल्म करने में ना हिचकिचाया हूं में, मैं जानता हूं

ईर्षा में पागल होकर छटपटाया हूं मैं, मैं जानता हूं
खुशी किसी कि भी ना देख पाया हूं मैं, मैं जानता हूं

काश के कोई समझा देता मुझे
जो असल बात है वोह बता देता मुझे

तो आज इतना पछतावा ना होता
रुंधे रुंधे गले से मैं इतना ना रोता

अब कोई मेरी कब्र पर फूल चढ़ाने नहीं आता
मेरे जिंदा ना होने का मातम नहीं मनाता

अब तो दोजक की आग जलाए मुझे
कब से जागा हूं, सुलाए मुझे

सब झूठ था, अब मानता हूं मैं
अब असल मैं कुछ जानता हूं मैं।

बिना सांसों के

चंद घड़ियां ही बाकी है इस तमाशे की
देखने वालों की धड़कनों को थमाना है

बिना सांसों के हमें जी कर दिखाना है

मिट्टी के घरों मैं तो बहुत रह लिए हम
अब दिलों में अपना आशियाना बनाना है

बिना सांसों के हमें जी कर दिखाना है

अब तो आखरी सांस का भी डर नहीं
मौत के सामने भी मुस्कुराना है

बिना सांसों के हमें जी कर दिखाना है

और कौन है जो गया नहीं
इस महफ़िल में तो आना जाना है

बिना सांसों के हमें जी कर दिखाना है

मस्ती से निकलूंगा अपनी सवारी पर
सुना है कि वोह सफ़र बहुत सुहाना है

बिना सांसों के हमें जी कर दिखाना है

यहां रुक कर भी क्या करोगे ऐ विशाल
यह तो सराए है, ना की तेरा ठिकाना है

बिना सांसों के हमें जी कर दिखाना है

उड़ान भरों और खुल के जियो तुम
मौत को भी शर्मिंदा कर जाना है

बिना सांसों के हमें जी कर दिखाना है

मोहब्बत करो हर किसी से
हर खुशी एक नज़राना है

बिना सांसों के हमें जी कर दिखाना है

समझ लो इस खेल को अच्छी तरह प्यारे
कुदरत को यह खेल तुम्हे कितनी बार खिलाना है

बिना सांसों के हमें जी कर दिखाना है

जान लो सब दांव पेंच इसके
हमें उसके खेल में उसी को हराना है

बिना सांसों के हमें जी कर दिखाना है