किसी और का दुख

क्यों किसी और कि मौत देखकर
मेरी आंख में आंसू नहीं आते

क्यों किसी का ग़म देखकर
मेरे जज़्बात सहम नहीं जाते

क्यों मुझे मेरा ग़म ही ग़म लगता है

क्यों ज़माने भर की काली रात मुझे दिखती नहीं
जब तक मेरा चिराग़ जागता है

जब औरों के सहारे ही है यह जीवन मेरा
तो फिर क्यों उनका दुख मुझे दिखता नहीं

क्यों मैं अपने सुख मै ही सना रहता हुं
जबकि मालूम है कि कुछ टिकता नहीं

ऐ शायर

कुछ अपनेपन की लकड़ियां इकट्ठी कर
और सद्भावना की आग सुलगा
इसी आग जी रोशनी से
सभी घरों को रोशन कर जा

यही जीवन की सच्चाई है, और कोई जीना जीना नहीं
किसी के ग़म में गर उसे गले ना लगाया
तो वोह सीना सीना नहीं

वोह जीना जीना नहीं।

05.10.2012

मेरी पहली उड़ान है

ऐ खुदा, मुझे हाथों में उठा, और आसमान में खुला छोड़ दे
मेरी पहली उड़ान है

हवा का रुख मेरी मंज़िल की और मोड़ दे
मेरी पहली उड़ान है

बड़ी मुद्दत से मुझे, इसी लम्हे का इंतज़ार था
पंखों की ही देरी थी, मेरा मन तो कब से त्यार था

आज मैं ऐसे उड़ु, की हवा को भी शर्मिंदा कर दु
जहां से भी गुज़रू, वहां के कण कण में रूह भर दु

रियासतों और विचारों की, सब लकीरें फिक्की कर दु
पूरी कायनात लाकर, अपने महबूब के क़दमों में रख दु

इस छोटी सी ज़िन्दगी में, बस कोशिश इतनी है मेरी
मेरी उड़ान सब को ख़ुशी दे, और टूटे दिलों को जोड़ दे

ऐ ख़ुदा, मुझे हाथों में उठा, और आसमान में खुला छोड़ दे

मेरी पहली उड़ान है।