क्या है ज़िन्दगी

बेमतलबी पन्नों पर, बेमतलबी शब्दों की कतारों का नाम ज़िन्दगी है

मैं को बचाने के लिए, खड़ी करी दीवारों का नाम ज़िन्दगी है

असल क्या है, यह तोह नहीं पता ऐ विशाल

पर लगता है, कि इकठ्ठे किए हुए विचारों का नाम ज़िन्दगी है।

कुछ यादें

कुछ यादें, कुछ लम्हें
कुछ बातें अनकही

कुछ अपना छोड़ के
कुछ रस्ते मोड़ के

मैं अपने घर से निकाल तोह पड़ा
सोच कर कि सामने सुनहेरा भविष्य है खड़ा

यहां आकर देखी काली रात
पर याद आई घरवालों की समझाई बात

की कुछ भी हो ना घबराना
जो करने गए हो, उसे पूरा कर के ही आना।