नमन भाई हमारे

नमन भाई हमारे

कुछ चुलबुले
कुछ समझदार है
घर से मालदार है
इसीलिए हमारे यार है

नमन भाई हमारे

पसंद आ गई इन्हे ऑस्ट्रेलिया की नार है
लफड़े हज़ार है
किंग स्ट्रीट के सरदार है

नमन भाई हमारे

घर वालों की नज़रों में होनहार है
पर सच पूछो तो, लड़खड़ाता किरदार है
मांगते हमेशा उधार है

नमन भाई हमारे

ऑस्ट्रेलिया आए हुए इन्हें हुए महीने चार है
ढूंढ रहे चमत्कार है
अमीर होने की धुन स्वार है

नमन भाई हमारे

दस्तूर-ए-ज़िन्दगी

दस्तूर-ए-ज़िन्दगी बहुत अजीब है
कहने को ज़िंदा है मगर
मौत के करीब है

ना जाने बनाने वालों ने हमें क्यों बनाया
छोड़ दिया इस काली नगरी में
और कुछ ना समझाया

अब दिन कटते नहीं मेरे, परेशान हुं
जानवरों का सा जीवन जी रहा हुं
और पुछु
क्या में सच मुच इंसान हुं।