मिल जाने को

क्यों है इतना इंतजार रे प्यारे
मेरा जो है, मिल जाने को

घर की दहलीज़ पर खड़े हम है
पर हाथ नहीं दरवाज़ा खटखटाने को

आवाज़ लगा रहा हुं कब से
और कितना वक़्त लगेगा तेरे बाहर आने को

सूनी अनसुनी मत कर प्यारे
मेरे पास कोई और नहीं है दर जाने को

कोई रस नहीं बचा पास है मेरे
एक प्रेम रस है मनाने को

अब तो आ कर मुझे मिल जा ठाकुर
कोई ढंग ना बचा रिझाने को

तू मिले तो सुलझे यह जीवन
पंडित, पोथी तो है उलझाने को

क्यों है इतना इंतजार रे प्यारे
मेरा जो है, मिल जाने को

ना जा चन्ना

वे ना जा चन्ना तू परदेस हा
वे अपने वरगा ना कोई देस हा
वे मेरी मां ने वाजा मैनू सी मारिया
वे रोंदी रई सी वेख की पुत मेरा जा रिहा
पर मेरी ता मत मर सी चुकी
दिल दी एह ख्वाहिश ना रुकी
ते मैं परदेस आ गया

हुण एथे बुरबुर रोना है
वे जागदा ना सोना है
वे अपने याद बड़ा आऊंदे ने
फेर मन दिल बड़ा पछतौंदे ने
की मैं क्यों परदेस आ गया

मैनु कोई घर पहुंचा दवो
मेरे घर दा रास्ता दिखा दवो
वे वाज़ा हुण मैं मारा वे
वे ज़िन्दगी हुण हारा वे
ते दिल विच हुण मैं सोचदा
की मैं क्यों परदेस आ गया