क्यों है इतना इंतजार रे प्यारे
मेरा जो है, मिल जाने को
मेरा जो है, मिल जाने को
घर की दहलीज़ पर खड़े हम है
पर हाथ नहीं दरवाज़ा खटखटाने को
आवाज़ लगा रहा हुं कब से
और कितना वक़्त लगेगा तेरे बाहर आने को
सूनी अनसुनी मत कर प्यारे
मेरे पास कोई और नहीं है दर जाने को
कोई रस नहीं बचा पास है मेरे
एक प्रेम रस है मनाने को
अब तो आ कर मुझे मिल जा ठाकुर
कोई ढंग ना बचा रिझाने को
तू मिले तो सुलझे यह जीवन
पंडित, पोथी तो है उलझाने को
क्यों है इतना इंतजार रे प्यारे
मेरा जो है, मिल जाने को

