कोई गोल गोल घेरे में चक्कर लगाता है
तो बात बेमतलबी है
तो बात बेमतलबी है
और कोई सुख के ख़ोज में दुख की और जाता है
तो बात बेमतलबी है
पर इस बेमतलबी दुनिया में मतलब कहां से लाऊं
भटके है सब लोग यहां, मैं किसे किसे समझाऊं।
05.01.2013

