दुनिया ने हमें सब सिखाया

दुनिया ने हमें सब सिखाया, पर मरना नहीं
ज़िन्दगी लंबी लगती है मगर, इसका ऐतबार करना नहीं

चंद लम्हों में ही सिमट कर खो जाती है
सांसों की लड़ी देखते ही देखते बंद हो जाती है

मरना तो किसी की ख्वाहिश नहीं है, फिर क्यूं मौत आती है
ज़िन्दगी आंखें नम कर लेती है, पर मौत को ना रोक पाती है

रह रह कर मन मेरा मुझसे पूछता है, की क्या मुझे भी मरना होगा
मैं भी जलूंगा कभी, क्या लकड़ियों का इंतज़ाम करना होगा

मुझे समझ नहीं आता कि अपने मन से क्या कहूं
शायद मैं और मेरा मन हम दोनों ही सच जानते है, पर इसे अनदेखा कैसे करू।

क्यों बेड़ियां मेरे पावों में है

क्यों बेड़ियां मेरे पावों में है
क्यों सिसकियां इन हवाओं में है

क्यों होंसला कमजोर है
क्यों पकड़ा एक ही छोर है

क्यों उड़ने से मैं डर रहा
क्यों ना कोशिश मैं कर रहा

क्या मन में चल रहा कुछ और है
क्या इसीलए इतना शोर है

क्या मन में मेरे चोर है
क्या इसने ही किया कमजोर है

कैसे लडू ख़ुद ही से मैं
जब मन ही मेरा चोर है|