उलझे रिश्ते

जो थे दोस्त हमारे, आज दुश्मन कहलाए है
बेवजह हमने रिश्ते उलझाए है

अनख के नाम पर दोनों भिड़ गए बाज़ार में
छोटी छोटी बातों पर बवाल उठाए है

बेवजह हमने रिश्ते उलझाए है

ना मुआफ़ हम कर पा रहे है उन्हें
ना माफ़ी वोह मांग पाए है

बेवजह हमने रिश्ते उलझाए है

पर इक दिन भी ऐसा नहीं, जब उनकी याद ना आई
बहुत रातों से ना तो हम, ना ही वोह सो पाए है

बेवजह हमने रिश्ते उलझाए है

दिल बहुत करता है की उनके दर पर दस्तक दे
पर माफ़ी के लिए कहां शब्द जुटा पाए है

बेवजह हमने रिश्ते उलझाए है

उम्र के इस पड़ाव पर यह कैसा बचपना है विशाल
फ़कीर जैसे अपनी झोली के सिक्के लुटाए है

बेवजह हमने रिश्ते उलझाए है

दोस्ती सही मानो मै आपसे ही सीखी है
मुआफ़ कर दीजिए हमें, अपनी गलती पर बहुत पछताए है

बेवजह हमने रिश्ते उलझाए है।

मेरी ही गलती थी

मेरी ही गलती थी

तुम्हे पीछे से बुलाना
जब सामने खड़ा था तमाशाई ज़माना

मेरी ही गलती थी

यूं बिना बताएं तेरी चोखट पर आना
आते जातों को अपनी मोहब्बत के किस्से सुनना

मेरी ही गलती थी

कुछ ना कुछ बना लेते थे तुमसे मिलने का बहाना
तुम आ जाती थी और मेरा भूल जाना

मेरी ही गलती थी

तेरी वफ़ा को मैं करता हूं सजदे
की मेरी गलतियों के बावजूद भी, ना ठुकरा कर सीने से लगाना

जबकि, मेरी ही गलती थी

तेरी सादगी, तेरी मैकशी ने असल मोहब्बत सीखा दी मुझे
की गर इश्क़ है तो आशिक़ की हर गलती को कैसे नज़रअंदाज़ कर जाना

जबकि, मेरी ही गलती थी