उड़ने की तमन्ना

उड़ने की तमन्ना और संभल कर चलना
यह एक ही सिक्के के दो हिस्से है

नहीं तो जनाब, खोलो किताब
उन जैसे लोगों के भरे पड़े किस्से है

की वोह लोग ऐसे गिरे
की गिरने की आवाज़ तक ना हुई

राख हुई उनकी उम्मीदें
और सपने जल गए जैसे हो रूई

दोनों ही पंख ग़र सबल हों
तब ही उड़ान भर सकते हो

हवा को शर्मिंदा
और क्षितिज का दीदार कर सकते हो

ग़र समझ गए तो खोलो दोनों पंख
और उड़ान भरो

छा जाओ पूरी कायनात पर
और अपनी मुठ्ठी में आसमान करो।

13.02.2013

तुम्हारी औकात नहीं है

तुम्हारी औकात नहीं है

मुझसे आंख मिलनी की
मेरे रूबरू हो जाने की

तुम्हारी औकात नहीं है

तुम्हारी कारस्तानी चेहरे पे लिखी है
लगता नहीं है, की तुम्हारी रूह पहली बार बिकी है

ना कहो कि तुम्हारा इरादा सही है
जो पहले भी की थी, यह गलती वही है

अब करने को बची, कोई बात नहीं है

तुम्हारी औकात नहीं है