Vishal Gupta मंजिल आज गुनगुनाने को जी चाहता है मस्ती में झूम जाने को जी चाहता है मंजिल की तरफ़ तो बहुत चल दिए हम आज बस यूंही चले जाने को जी चाहता है। 13444 thumb_up thumb_down 0
Vishal Gupta रे ओ श्यामा रे ओ श्यामा, रेे ओ प्यारे ना जाने कब मिल होगा पुकारते है हम चारों पहर ना जाने कब तेरा दिल होगा शिकायत मैं नहीं करता बहाने तुम बनाते हो कभी किस्मत, कभी बन्धन कर्मो का बताते हो अगर तुम ज़िद के पक्के हो तो कम हम भी है कहां धरा पर मिल ना पाए गर तो मिलने आएंगे तू जहां 13906 thumb_up thumb_down 0