शायद मैंने पी है

सर्द हवाओं ने बताया की मैंने पी है
उस की आँखों ने दिखाया की मैंने पी है

शायद मैंने पी है

इस पल में इतना मज़ा है के साकी
की सारी ज़िन्दगी इसके आगे फिक्की है

शायद मैंने पी है

यह नशा जाम-ए-शराब का नहीं, मेरे मेहबूब की मोहब्बत का है
जिसने एक नज़र में ज़िन्दगी जवाँ कर दी है

शायद मैंने पी है

अब नशा उसके दीदार का ऐसा है मूझे
लगता है की सारी दुनिया मैंने मुठी में की है

शायद मैंने पी है

रिश्तों की समझ

रिश्तों की तुम्हें समझ नहीं, अपनों की पहचान नहीं
घर की तुम्हें कद्र नहीं, घरवालों का मान नहीं

मन की ग़ुलाम हो तुम, ज़िम्मेदारी से अनजान हो तुम
न जाने किस ख़ुशी को ढूंढ रही हो, अपने आप से ही अनजान हो तुम

इसीलिए परेशान होती हो और परेशान करती हो तुम
मन को ना जाने किन किन विचारों से भरती हो तुम

खुश नसीब हो, की रखने वालो ने रखा है
बड़ी मुश्किल से इन्होंने अपने मन को किया पक्का है

अब इम्तिहान ना लो इनका, सब्र का सब्र भी टूट जाता है
इस खामोशी को इनकी कमज़ोरी ना समझो, यह तूफ़ान से पहले का सन्नाटा है

अल्लाह के बन्दों को जिस ने भी कभी छेड़ा, वोह सरे-आम चौराहों पर लुट जाते है
अहम् टूट जाते है, अहम् टूट जाते है