शक शुबहा है

ना जाने क्यों शक शुबहा है

इस भगवान की कहानी पर
मुझे ना जाने क्यों शक शुबहा है
एक छवि में मर्यादा पुरषोत्तम
और एक में हज़ारों मेहबूबा है

ना जाने क्यों शक शुबहा है

कोई कहें वोह मंदिर मस्जिद
कोई कहें जोगी या सिद्ध
कोई कहता वोह हर जगह है

ना जाने क्यों शक शुबहा है

कोई एक रास्ता दिखाओ मुझको
क्या करना समझाओ मुझको
धर्म के ठकेदरों कर रहे गुमराह है

ना जाने क्यों शक शुबहा है

अजीब बात है

अजीब बात है के तुम नहीं आए
तुम्हारी खुशबु फिर भी महकती है

तुम सामने नहीं हो हमारे
फिर भी नज़र बहकती है

कैसा जादू यह तुमने, नज़रों ही नज़रों में डाला है
लोग कहते है मुझे की मैंने, दर्दे दिल का रोग पाला है।