मेरी ही गलती थी

मेरी ही गलती थी

तुम्हे पीछे से बुलाना
जब सामने खड़ा था तमाशाई ज़माना

मेरी ही गलती थी

यूं बिना बताएं तेरी चोखट पर आना
आते जातों को अपनी मोहब्बत के किस्से सुनना

मेरी ही गलती थी

कुछ ना कुछ बना लेते थे तुमसे मिलने का बहाना
तुम आ जाती थी और मेरा भूल जाना

मेरी ही गलती थी

तेरी वफ़ा को मैं करता हूं सजदे
की मेरी गलतियों के बावजूद भी, ना ठुकरा कर सीने से लगाना

जबकि, मेरी ही गलती थी

तेरी सादगी, तेरी मैकशी ने असल मोहब्बत सीखा दी मुझे
की गर इश्क़ है तो आशिक़ की हर गलती को कैसे नज़रअंदाज़ कर जाना

जबकि, मेरी ही गलती थी

मन का ख़ौफ

मन मुझे ख़ौफ दिखता है
आने वाले कल की मुश्किलें बताता है

कहता है कि जब सब जी रहे है इसी तरह
तो क्या सच मुच सही है मेरा दूसरी राह खोजना

कहीं भटक ना जाना, कहीं भटक ना जाना
यह कह कह कर भटकाता है

हूं शुभ चिंतक मैं तुम्हारा
यह कह कर भरमाता है

पर मुझे इस चपल मन की चतुराई का ख़ूब अंदाज़ा है
क्यूंकि इसकी बातों में आकर, खाई ठोकरों के जख्म अभी ताज़ा है

बहुत बार इसकी बातों मैं आ चुका हूं मैं
इसके पीछे चल के ख़ूब ठोकरें खा चुका हूं मैं

अब प्रकाश की इक किरण पकड़ कर
सूरज की तलाश में चलूंगा मैं

खोज अब उसकी ही होगी
चाहे पास जाने पे जलुंगा मैं ।