काली रात तो बाद स्वेर

छड़ ओह कमलेया विशाला
जग दे सारे फेर

किस पासे दिया करिए
जद सारे पासे हनेर

जे कोई इस चो निकल लेया
ता उस मालिक दी मेहर

मन ना होला कर वे चंदरेया
आऊगी काली रात तो बाद स्वेर।

15.12.2012

चंद लम्हों की उम्मीद

चंद लम्हों की उम्मीद है मुझको
बाकी सब थोड़ा है

ज़माना पूछ रहा है मुझसे
की मैंने क्यों सब छोड़ा है

अपना ठिकाना है हवां सा
मगन गगन में घुमु

फूलों की पंखुड़ियां छेड़ू
और तितलियों के परों को चुमु

इतना दुख देखा है मैंने
की अब दुख भी मुझसे भागे

अब इत्मीनान से चलता हूं मैं
नहीं परवाह क्या है आगे

बस अब इक ही चाहना है बाकी
इक ही बाकी तमन्ना

की ज़िन्दगी तो फूलों से हो गई
पर मौत से कैसे संभालना

अभी मेरा मरना है बाकी
और जैसे दीयो की बाती, सब जलती है बुझने को

कितना भी लंबा सफर ही साकी
सब चलते है रुकने को

चलना ही ज़िन्दगी की है आदत
चलना ही है जीना

मौत गर कहीं दिख भी जाए
सामने कर देना अपना सीना

मस्ती में चलना और हर पल खिलना
अब आदत है मेरी

बैठा हूं त्यार मैं अब तो
मौत की तरफ से है देरी ।

25.12.2012