तुम्हारी औकात नहीं है
मुझसे आंख मिलनी की
मेरे रूबरू हो जाने की
तुम्हारी औकात नहीं है
तुम्हारी कारस्तानी चेहरे पे लिखी है
लगता नहीं है, की तुम्हारी रूह पहली बार बिकी है
ना कहो कि तुम्हारा इरादा सही है
जो पहले भी की थी, यह गलती वही है
अब करने को बची, कोई बात नहीं है
तुम्हारी औकात नहीं है

