ऐ दोस्त

तुम दोस्त हो कर, मेरी किसी बात पर मुस्कुराते नहीं।
मैं आवाज़ लगाता रह जाता हूं, पर तुम लोट कर आते नहीं।।

यह कैसी दोस्ती है, जिसमें तुम मेरे साथ वक्त बिताते नहीं।
कहां हो, कैसे हो, क्या कर रहें हो, पूछो तो कुछ बताते नहीं।।

कभी कभी तो यूं लगता है, की अब वोह पुरानी वाली बात रही नहीं।
पहले घंटों होती थी एक के बढ़कर एक फिजूल की बातें, अब कहते हो की करने को कोई बात नहीं।।

क्या करते रहते हो आज कल, क्या है जिसमे इतना खो गए हो तुम।
लगता है जैसे जिंदगी की परेशानियों से, कुछ ज्यादा ही मायुस हो गए हो तुम।।

बाहर आयो इस उलझावे से, देखो मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।
मिल जाए मुझे वही पुराना दोस्त, दुआ यह बार बार कर रहा हूं।।

मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।

बीमारी

बीमारी अपने साथ कितनी चुनौतियां ले कर आती है।
आती तो है तेज़ी से, पर वापिस धीरे धीरे जाती है।।

यह ना आए किसी को भी, यही दुआ मांगता हूं मैं।
कितना परेशान कर देती है यह, अच्छी तरह जानता हूं मैं।।

मेरी मालिक यही दुआ है मेरी, तेरे रहमो करम से कबूल हो।
मैं और मेरा परिवार स्वस्थ और संपन रहे, इतनी इनायत हम पर जरूर हो।।