वक़्त

वक़्त का दस्तुर भी अज़ब निराला है
कभी गिराया और कभी इसी ने संभाला है

यूं तो कायर है, पल पल करके सामने आता है
अतीत की चुभन और भविष्य की फ़िकर, इन दोनों में ही भरमाता है

कभी कमजोर तो कभी बलवान जान पड़ता है
जहां कदर नहीं, वहां तो भरपूर है मगर, कहीं चंद घड़ियां देने में भी अखरता है

मैं इसके रूबरू होना चाहता हूं
मैं इसे बेपर्दा करना चाहता हूं

पर जब भी मुशक्कत करता हूं, कहीं दूर पहुंच जाता हूं
असल को छोड़कर, बेमतलबी गालियों में जरूर पहुंच जाता हूं

पर ज़िद है मेरी, की इक बार तो सामना हो
जिस वक़्त ने चलाया तय ज़िन्दगी, उस वक़्त का कुछ तो जानना हो
इक बार तो सामना हो।

24.02.2015

सिक्कों की शांति

सारे विश्व की आवाम, एक ही बात जानती है
की नोटों की गड्डियों में ही शांति है

जितने हो उतने कम है
इनसे ही मिटते सब गम है

सब सुखों का कारण है यह
आनंद का उदहारण है यह

मुझे भी यही सिखाया था
बचपन से यही पढ़ाया था

इसीलिए

कमाने के लिए, हाथों में पकड़े कटोरे थे
बड़ी मेहनत से, चंद सिक्के मैंने बटोरे थे

पर सिक्कों ने जो वादा किया था, वोह सुख दिया नहीं
और मन ने सोचा, कि शायद अभी माकूल सिक्कों को इकठ्ठा किया नहीं

मन की तृष्णा क्यों यह मानती नहीं
की दुनिया भर के सिक्कों में भी शांति नहीं

गलती हमारी नहीं दरअसल, सिखाने वालों ने हमें गलत ही सिखाया
सिक्के ही सुख का कारण है, यही बतलाया

मैं तो जान गया हूं अब, पर ना जाने यह आवाम कब यह समझ पाएगी
की जीवन की सच्चाई, इन सिक्कों की पकड़ में कभी नहीं आएगी।

04.10.2012