अगर कोई खुश है तोह वोह
क्या और खुश होना चाहेगा।
अगर हाँ तो कितनी और
ख़ुशी से उसका मन भर जाएगा।
ता उम्र भाग के देख लिया
मन तोह मेरा भरता नहीं।
जितना भी मिल जाये इसे
यह कभी उतने में सब्र करता नहीं।
क्या यही ज़िन्दगी का मकसद है
या कुछ और भी पाना है।
या सच में कोई मकसद नहीं है
सिर्फ ख़ुशी ढूंढना ही बस एक बहाना है।।
Category: Recommended
समय
बीता समय, अच्छा था या बुरा, कुछ याद नहीं । क्या वोह लम्हे बरकत के थे या हरज़े के, कुछ याद नहीं ।। याद है तो बस इतना, की जिंदगी थी और हम जिंदा थे । क्यों और कैसे, उतना सब तो अब याद नहीं ।। याद करके करना भी क्या है ओ शायर, समय तो बह कर गुज़र गया । आज खड़ा है सामने हाथ बढ़ाए, की चलो कुछ नई यादें बनाएं ।। अब कोशिश हो की ऐसे जिए, की लम्हा-दर-लम्हा याद रहे । सजाए कुछ ऐसा यादों के आशियाने को, की हमारे जाने के बाद भी वोह आबाद रहे ।।

