मेरी सच्चाई

शब्दों की कतारों में
अर्थ कहीं ना खो जाए

बड़ी मशक्कत से जुटाई मेरी सच्चाई
बेमायनी कहीं ना हो जाए

इसलिए कुछ भी लिखने से डरता हूं मैं
लोग समझ नहीं पाते पर सीधी बात करता हूं मैं

क्यूंकि मुझे मरकर शब्द मिले है
जिनका आज सहारा है मुझे

यह उस वक़्त की सच्चाई है
जब ज़िन्दगी और मौत, दोनों ने मिलकर निहारा है मुझे

पहले का जीना जीना नहीं था
अब हर इक सांस दिल तक उतरती है

मेरी तो अब हर इक घड़ी
इसी सच्चाई में गुजरती है

इन्हीं लम्हों को देखना इबादत है उसकी
और इस सच्चाई का दीदार करना ही सूरत है उसकी।

23.02.2013

मां थक गया चलते चलते

मां थक गया चलते चलते
मैं इन पथराई हुई सी रहो में

थामो अब मुझको बाहों में

उस गोद का सहारा दो
जिस गोद में हम खेले है

दिल से लगा को बेटे को
अरसे से हम अकेले है

अब आंसू भी है सूख चुके
तेरी यादों में बहते बहते

पत्थर से मां हम बन है गए
तेरे बिन कहीं और रहते रहते

इस पत्थर को कोमल कर दो
मां तुम अपने दुलार से

मां छू दो तुम मेरे दिल को
भर जाए जीवन प्यार से

मां जल्दी करो, ना देर करो
दम निकल ना जाए इन्हीं आहों में

थामो अब मुझको बाहों में

थामो अब मुझको बाहों में