ना देख पाए ज़िन्दगी

नज़र अंदाज़ कर के
बख़ूबी चल रही थी ज़िन्दगी
जिस दिन रूबरू हुए
उस दिन घबरा गए हम

इतना कुछ बीत रहा था
उसके साथ
की हालत उसकी देख के
शर्मा गए हम

कुछ देर भी यह नज़ारा
देख ना सके
मन की चुभन के चलते
नज़रे छुपा गए हम।

तेरे आने को दाता

तेरे आने को दाता
हवा ने बात चलाई है
बरखा ने धरती को धोया है
फूलों ने पगडंडी बनाई है

मां लक्ष्मी ने बल बुद्धि विद्या दे के
मन मंदिर में ज्योति जगाई है
जिभा देहली भी रामा
तेरे ओहो गाद से सजाई है

हर दिए को कहा है दाता
हर दिए को बात बताई है
उनके बुझने से पहले आयोगे तुम
यह उनसे शर्त लगाई है

सारी दुनिया देखने आ रही
की यह रोशनी कहां जगमगाई है
आज मिलने की घड़ी आई है
सांसों में बजी शहनाई है

दाता पग धरो, कृपा करो
दाता पग धरो, कृपा करो
तेरे राज़ तिलक की रामा
शुभ घड़ी आज आई है

सांसों में बजी शहनाई है। – 2