शादी के बाद का आना जाना

शादी के बाद का आना जाना
हर शनि इतवार रिश्तेदारों के घर खाना

साड़ी पहनना और मेकअप करना, मुझको तो लगती सजा़ है
मेरी तो जीन्स और जैकेट, पहनने की रजा़ है
यह कहते है यह सब पहन कर, मेरी नाक ना कटवाना

शादी के बाद का आना जाना
हर शनि इतवार रिश्तेदारों के घर खाना

सात से दस, फ़िल्म वीर का शो है
कोनो वाली सीट है, और आखरी रो है
मेरी मानो तो लगादो, बीमार होने का बहाना

शादी के बाद का आना जाना
हर शनि इतवार रिश्तेदारों के घर खाना

मैं तो कहती हूं, जाने की फ़ीस तय कर को
फिर तो चाहे इस लिस्ट में, दो चार नाम और भर लो
यह कहते ऐसा ना सोच, तेरी फैमिली ने अभी है बुलाना

शादी के बाद का आना जाना
हर शनि इतवार रिश्तेदारों के घर खाना

जिस घर में भी जाओ, वहां इंडियन खाना ही खिलाते है
ना कोई मोकटेल और ना कोई कॉकटेल, बस नींबू पानी पिलाते है
मैं चलती हुं तुम्हारे साथ, अगर वहां अलग से चाइनीज है मंगवाना

शादी के बाद का आना जाना
हर शनि इतवार रिश्तेदारों के घर खाना।

दादा जी

जी कहा है सदा उन्होंने, जी ही सदा कहलाया है
जब पूछा की क्या हाल है, ‘रंग लगा’ बतलाया है

यह बनिया बातों का खज़ाना, ना जाने क्या क्या समाया है
बहुत किया होगा तप मैंने, जो ऐसे दादा जी को पाया है

तेहमत कुर्ता टोपी वाले ने, धारी शाह नाम कहलाया है
बचपन से ही उन्होंने, हर काम कर दिखाया है

जामुन का है पेड़ जो इनका, उसे कभी ना हिलाया है
बस ब्याज में जो जामुन मिले, उन्हीं को खुश हो खाया है

बड़ी पैनी है नज़र इनकी, हर एक चीज़ दिखती है
नहीं गए है स्कूल कभी, पर कलम दुरुस्त लिखती है

कान भी बड़े पतले है इनके, हर बात की खबर होती है
मुंह में नहीं है दांत इनके, जैसे सीप से चोरी हुए मोती है

है पक्के असुल बापू के चेले
राम राम जपते जब होते अकेले

खाने में मुंगी की दाल ही भाए
शाम को अपनी महफ़िल में जाए

हर बार दी है सही सलाह, हर बार सही रास्ता दिखाया है
बहुत किया होगा तप मैंने, जो ऐसे दादा जी को पाया है।