मेरा आखरी वक़्त है

ना करो मुझसे झिलाकर बात, मेरा आखरी वक़्त है
ना करो दिल दुखाने वाली बात, मेरा आखरी वक़्त है

जब भी तुम मुझे गुस्सा दिखाते हो, मैं परेशान हो जाता हूं
गुम सुम सा हो जाता हूं, मैं भीतर से लहूलुहान हो जाता हूं

हां मैने भी कहें है, कड़वे शब्द और तीर जैसी नोकिली बातें
क्या करू भीतर का दुख संभालता ही नहीं था, जब भी तुम कुछ कह जाते

मैं तो यहां अपना वक़्त पूरा कर रहा हूं
जल्दी ख़त्म हो यह ज़िन्दगी, इसीलिए तेज़ी से सांसे भर रहा हूं

पर मन में मलाल है, कि बहुत दिनों से तुमसे बात नहीं की है मैंने
क्रोध और डर दोनों, दे ही नहीं रहे है जीने

क्रोध इस बात का है, कि तुमने ऐसा कहां वैसा कहां
और डर इस बात का है, की शायद बात करने का मोका ना मिले दोबारा

तो अब बात शुरू कर ले, ताकि मेरे जाने पर तुम्हे बात ना करने का गिला ना रहे
नहीं तो शायद, दीवारों तस्वीरों को सुनायोगे वोह बातें और किस्से अनकहे

पर मुझे चुभे ऐसा कुछ ना कहना, मेरा आखरी वक़्त है
हो सके तो जाने के पलों में मेरे साथ ही रहना, मेरा आखरी वक़्त है।

मेरे इशारों पर

ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर

कभी झूमती, कभी नाचती
साज़ की बजती तारों पर

ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर

कभी है हंसती, कभी है रोती
अपने खुद के विचारों पर

ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर

कभी दमकती, कभी चमकती
अपने खड़े किए मीनारों पर

ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर

कभी है जलती, कभी है बुझती
व्यंग कसती अंधकारों पर

ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर

कभी है चड़ती, कभी उतरती
आ कर रुकती, किनारों पर

ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर

कभी है खिलती, कभी मुरझाती
छा जाती है बहारों पर

ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर

कभी बरसती, कभी गरजती
खुशियां बिखेरे हज़ारों पर

ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर

कभी सिमटती, कभी बिखरती
बनती तस्वीर दीवारों पर

ज़िन्दगी क्यों नहीं चलती, मेरे इशारों पर।

01.04.05