क्यों बेड़ियां मेरे पावों में है
क्यों सिसकियां इन हवाओं में है
क्यों सिसकियां इन हवाओं में है
क्यों होंसला कमजोर है
क्यों पकड़ा एक ही छोर है
क्यों उड़ने से मैं डर रहा
क्यों ना कोशिश मैं कर रहा
क्या मन में चल रहा कुछ और है
क्या इसीलए इतना शोर है
क्या मन में मेरे चोर है
क्या इसने ही किया कमजोर है
कैसे लडू ख़ुद ही से मैं
जब मन ही मेरा चोर है|

