मां तुमसे किया हर वादा

सपने, उम्मीदे, वादे, मैं पूरे कर दिखाऊंगा
मां तुमसे किया हर वादा, मैं जरूर निभाऊंगा

आशाएं जीवन की चाहे, रोशनी ना दे मुझे
उस अंधेरे में मैं मां, तेरे ज्ञान कि मशाल जलाऊंगा

मां तुमसे किया हर वादा, मैं जरूर निभाऊंगा

राहें चाहे भर ले अपने आप को कांटो से
तेरे प्यार के सुमन, मैं उन पर बिछाऊंगा

मां तुमसे किया हर वादा, मैं जरूर निभाऊंगा

बादल गरजे, बिजली चमके या बरसे बरसात
तेरे आशीर्वाद की ताकत से मैं, आगे बढ़ता जाऊंगा

मां तुमसे किया हर वादा, मैं जरूर निभाऊंगा

पर एक ही कसक है दिल में, जो कांटो सी चुभती है
की इस एक जीवन में मैं मां, तेरा कर्ज़ कैसे चुकाऊंगा

मां तुमसे किया हर वादा, मैं जरूर निभाऊंगा।

दस्तूर-ए-ज़िन्दगी

दस्तूर-ए-ज़िन्दगी बहुत अजीब है
कहने को ज़िंदा है मगर
मौत के करीब है

ना जाने बनाने वालों ने हमें क्यों बनाया
छोड़ दिया इस काली नगरी में
और कुछ ना समझाया

अब दिन कटते नहीं मेरे, परेशान हुं
जानवरों का सा जीवन जी रहा हुं
और पुछु
क्या में सच मुच इंसान हुं।