मां थक गया चलते चलते

मां थक गया चलते चलते
मैं इन पथराई हुई सी रहो में

थामो अब मुझको बाहों में

उस गोद का सहारा दो
जिस गोद में हम खेले है

दिल से लगा को बेटे को
अरसे से हम अकेले है

अब आंसू भी है सूख चुके
तेरी यादों में बहते बहते

पत्थर से मां हम बन है गए
तेरे बिन कहीं और रहते रहते

इस पत्थर को कोमल कर दो
मां तुम अपने दुलार से

मां छू दो तुम मेरे दिल को
भर जाए जीवन प्यार से

मां जल्दी करो, ना देर करो
दम निकल ना जाए इन्हीं आहों में

थामो अब मुझको बाहों में

थामो अब मुझको बाहों में

मक़सद-ए-मगरूर

वोह मक़सद-ए-मगरूर है
अल्लाह से कितना दूर है

वोह नादान है, नापाक है
घरों में पलते सांप है
मुर्शद मुरीद की मौत पर
कहते की मिलती हूर है

वोह मक़सद-ए-मगरूर है
अल्लाह से कितना दूर है

इंसाफ कर, हिसाब कर
इंसाफ कर, मौला आज कर
यह कयामत का क्या दस्तूर है

वोह मक़सद-ए-मगरूर है
अल्लाह से कितना दूर है

मौला ज़िन्दगी, पर सकून नहीं
मौला मस्जिदें, पर तु नहीं
यह कैसी अंधेरी रात है
जो हर इंसान नशे में चूर है

वोह मक़सद-ए-मगरूर है
अल्लाह से कितना दूर है