मसला

कुछ डरा सा हूं, कुछ होंसला भी है
क्या महसूस करू, मसला यही है

कुछ दूर से मुझे कुछ, दिख तो रहा है
क्या वोह सच में है सूरज, या कोई टॉर्च जली है
कैसे बताऊं, मसला यही है

मैं डरता नहीं हूं, खुद को बहुत बार बोला
आखिर डर छुपता कहां है, कोना कोना खंगोला
है भी और मिलता नहीं है, मसला यही है

समय उसी और भागा है जाए
कैसे रोकू इसे, क्या करू उपाय
रेस तोह है मगर ब्रेक नहीं है, मसला यही है

सिसकी

सिसकी यह मन, कुछ यूं है भरे
यादों को तेरी जब, याद करे

लम्हें जो काटे थे, साथ हमने
उन यादों के ज़ख्म, फिर हुए हैं हरे

दिल की ख्वाहिश, वोह जाने बिना ही कहें
वोह पथ पर ना जाने, कहां छूट गए

वोह पत्थर हुए, हम हुए है पानी
पत्थर कैसे की, जो पानी पे तरे