मूर्ति पुज के राम मिले तो

मूर्ति पुज के राम मिले तो, मै पुजू पहाड़

राम तेरा तेरे भीतर छुपा है, उसको ले पहचान

तुझ पर कृपा करता है वोह, कितना दीन दयाल

दुख में जब सब छोड़ के जाते, वोह रहता तेरे पास

सुख दुख में वोह साथ है तेरे, रख उस पर ही आस

दुख मैं भी तू निडर रहना, ना सुख की करना आस

राम का रिश्ता तुझ से वैसा, जैसे पानी संग है प्यास

बाहर की आंखें बंद कर ले, भीतर आंखें खोल

भीतर समाए राम के, संग संग तू डोल

फिर तू समझ जाएगा प्यारे, कहां राम का वास

मूर्ति पुज के राम मिले तो, मै पुजू पहाड़ ।

ख़ुशी की चाहत

अगर कोई खुश है तोह वोह
क्या और खुश होना चाहेगा।

अगर हाँ तो कितनी और
ख़ुशी से उसका मन भर जाएगा।

ता उम्र भाग के देख लिया
मन तोह मेरा भरता नहीं।

जितना भी मिल जाये इसे
यह कभी उतने में सब्र करता नहीं।

क्या यही ज़िन्दगी का मकसद है
या कुछ और भी पाना है।

या सच में कोई मकसद नहीं है
सिर्फ ख़ुशी ढूंढना ही बस एक बहाना है।।