चंद लम्हों की उम्मीद

चंद लम्हों की उम्मीद है मुझको
बाकी सब थोड़ा है

ज़माना पूछ रहा है मुझसे
की मैंने क्यों सब छोड़ा है

अपना ठिकाना है हवां सा
मगन गगन में घुमु

फूलों की पंखुड़ियां छेड़ू
और तितलियों के परों को चुमु

इतना दुख देखा है मैंने
की अब दुख भी मुझसे भागे

अब इत्मीनान से चलता हूं मैं
नहीं परवाह क्या है आगे

बस अब इक ही चाहना है बाकी
इक ही बाकी तमन्ना

की ज़िन्दगी तो फूलों से हो गई
पर मौत से कैसे संभालना

अभी मेरा मरना है बाकी
और जैसे दीयो की बाती, सब जलती है बुझने को

कितना भी लंबा सफर ही साकी
सब चलते है रुकने को

चलना ही ज़िन्दगी की है आदत
चलना ही है जीना

मौत गर कहीं दिख भी जाए
सामने कर देना अपना सीना

मस्ती में चलना और हर पल खिलना
अब आदत है मेरी

बैठा हूं त्यार मैं अब तो
मौत की तरफ से है देरी ।

25.12.2012

उसका मिलना

रौनक छा रही है, हमारे चेहरे पर
वोह मिलने आ रही है, हमारे कहने पर

ज़िन्दगी जीने लायक हुई है, उनके मिल जाने पर
रब दिख जाता है मुझे, उनके दिख जाने पर

दुनिया कितनी हसीन लगती है, प्यार हो जाने पर
हर चेहरा मेरे महबूब का है, यह नज़र मिल जाने पर

हर तमन्ना मेरी पूरी हुई है, उनको पा लेने पर
मैं पूरा हो गया हूं, उसे दिल में समाने पर।