शहर की आबादी

मेरे शहर की आबादी बड़ गई है
सड़को पे लोगो की आवाजाही बड़ गई है

सड़के, दुकानें, गालियां और घर
सब भीड़ से भर गए है

छोटे छोटे मकानों में कबूतरों की तरह रहने लगे है लोग
बड़े मकान में रहने के जो थे सपने, वोह जेहन से उतर गए है

पहले दो तीयाही जी कर और एक तियाही ज़िन्दगी सो कर गुजरती थी
अब एक तियाहि से ज्यादा तोह सड़क पे गुजर जाती है, जीने और सोने का तोह पूछो ही मत

सड़क को ही अब मैं अपना घर मानता हूं
उससे घर पर ना होने कि तकलीफ कम है

क्यूंकि इतने लोग होने के बावजूद भी, जितने फासले दिलो के है
उनसे तोह अभी सड़को के फासले कम है।।

ख़ुशी की चाहत

अगर कोई खुश है तोह वोह
क्या और खुश होना चाहेगा।

अगर हाँ तो कितनी और
ख़ुशी से उसका मन भर जाएगा।

ता उम्र भाग के देख लिया
मन तोह मेरा भरता नहीं।

जितना भी मिल जाये इसे
यह कभी उतने में सब्र करता नहीं।

क्या यही ज़िन्दगी का मकसद है
या कुछ और भी पाना है।

या सच में कोई मकसद नहीं है
सिर्फ ख़ुशी ढूंढना ही बस एक बहाना है।।