मूर्ति पुज के राम मिले तो

मूर्ति पुज के राम मिले तो, मै पुजू पहाड़

राम तेरा तेरे भीतर छुपा है, उसको ले पहचान

तुझ पर कृपा करता है वोह, कितना दीन दयाल

दुख में जब सब छोड़ के जाते, वोह रहता तेरे पास

सुख दुख में वोह साथ है तेरे, रख उस पर ही आस

दुख मैं भी तू निडर रहना, ना सुख की करना आस

राम का रिश्ता तुझ से वैसा, जैसे पानी संग है प्यास

बाहर की आंखें बंद कर ले, भीतर आंखें खोल

भीतर समाए राम के, संग संग तू डोल

फिर तू समझ जाएगा प्यारे, कहां राम का वास

मूर्ति पुज के राम मिले तो, मै पुजू पहाड़ ।

पाकीज़ा

पाकीज़ा, यह बात कैसी है
तेरी चौखट पर ही आते है

हुस्न वाले तो और भी है बाज़ार में
दुनिया भर के हुस्न में हम अक्स तेरा ही पाते है

पाकीज़ा, यह बात कैसी है
तेरी चौखट पर ही आते है

अगर तुम हुस्न लुटाती हो
तो हम भी झोली लुटाते है

पाकीज़ा, यह बात कैसी है
तेरी चौखट पर ही आते है

हाथों से पिलाती नहीं, दिल-ए-जा़म बनती हो
कुछ ही चुस्कियों में हम, मदहोश हो जाते है

पाकीज़ा, यह बात कैसी है
तेरी चौखट पर ही आते है