आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

पत्थर दिल हो जा ए मुसाफ़िर
जीना यहीं है
जग ने कहीं है
शायद सही है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

ना कोई है अपना
ना कोई पराया
ठोकरों ने जग की, है यही समझाया
सूने पलो के कांटे अब चुभते नहीं है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

ज़ख्मों का क्या है विशाल
वोह तो भर ही जाएंगे
थोड़ा और मजबूत, तुम्हें कर ही जाएंगे
ज़ख्म पुराने, अब दुखते नहीं है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

उम्र का तजुर्बा यही है विशाल
मुरझाने के बाद, फूल खिलते नहीं है

आंखों के आंसू अब गिरते नहीं है

मुक्ति


गर ना करो कोई इच्छा
तो मुक्त हो तुम
मान लो कथन यह सच्चा
तो मुक्त हो तुम

मन ही है,
जो तुम्हे भटकाए
असल को छुड़वा,
अपने पीछे लगाए
जब छोड़ो पीछा इसका,
तो मुक्त हो तुम

गर ना करो कोई इच्छा
तो मुक्त हो तुम

पर मन से परे हम,
कैसे है जाए
हर जगह इसने,
अपने सिपाही बिठाए
जो पकड़ो सांस का रस्ता,
तो मुक्त हो तुम

गर ना करो कोई इच्छा
तो मुक्त हो तुम

देखते देखते यह,
सिमटता है जाए
मिटने से पहले जब,
मन आंखें टिमटिमाए
ध्यान रहे तब पक्का,
तो मुक्त हो तुम

गर ना करो कोई इच्छा,
तो मुक्त हो तुम

गहन नींद में जब,
यह खो जाए
गर तब भी तुम,
अगर ना डगमगाए
जैसे ही मैं ने मैं को देखा,
तो मुक्त हो तुम

गर ना करो कोई इच्छा,
तो मुक्त हो तुम

असल को तुम,
जब पहचानोगे
तुम क्या हो,
तुम यह जानोगे
मिट जाएगा कर्मों का लेखा,
तो मुक्त हो तुम

गर ना करो कोई इच्छा, तो मुक्त हो तुम