ख़ुशी की चाहत

अगर कोई खुश है तोह वोह
क्या और खुश होना चाहेगा।

अगर हाँ तो कितनी और
ख़ुशी से उसका मन भर जाएगा।

ता उम्र भाग के देख लिया
मन तोह मेरा भरता नहीं।

जितना भी मिल जाये इसे
यह कभी उतने में सब्र करता नहीं।

क्या यही ज़िन्दगी का मकसद है
या कुछ और भी पाना है।

या सच में कोई मकसद नहीं है
सिर्फ ख़ुशी ढूंढना ही बस एक बहाना है।।

मां

जिस मां के है बच्चे हम सब
उसको तुमने धुतकारा था
उस मां के दिल से पूछो
की कैसे उसने उन शब्दों को सहारा था

ख़ुद गिले में सो कर
तुमको सूखे में सुलाया था
क्या भूल गए उस कर्ज़ को
जो आज तक ना चुकाया था

कितने सपने उसने सजाए थे
एक महल सपनो का बनाया था
अब उसके सारे सपने टूट गए
जब मां से ही बच्चे रूठ गए

मां के दिल का क्या था हाल
शब्द ना कर पाएंगे उसका व्याखान

उस लड़के के दोस्त ने उसे समझाया था
की जा कर पूछो उन बच्चों से
जिन्होंने जीवन में मां का प्यार ना पाया था

जब बचपन कि याद आई
दिल के तार खनक उठे
की किस तरह मुझको पाला था
मुझ गिरते को संभाला था

अब मां का मोल वोह समझ गया
पर नज़रों से अपनी ही गिर गया

सोचा कि अब मां के सामने कैसे जयुंगा
किस तरह मुंह दिखाऊंगा

होंसला कर के मां के सामने गया वोह जब
मां के आंसू निकले तब

बेटे को गले से लगाया था
पुराना सब भुलाया था।