मेरी नाकामयाबीयां बस मेरी ही है
मैं ही हूं जो की हंसता रहा, मुस्कुराता रहा
यह कह के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
जो भी यह बिखरी चीजे है, यह सब मेरी है
मैं ही था जो बेपरवाह होकर इनको गिरता गया
यह सोच के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
मैं अपने आप को कहता रहा की संभलना क्यों है
थोड़ी देर और इसी नशे में रहने दो खुद को
क्योंकि अभी तो वक्त बहुत बाकी है
मुझे सच में यकीन था कि बहुत वक्त है पास मेरे
उन कीमती पलो के सिक्के को मैं लुटाता गया
यह सोच के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
आज मेरे हाथों मैं वक्त की लकीरे हैं और कुछ भी नही
सब आगे बड़ गए, मेरे पास खड़ा कोई भी नहीं
अब लगता है की निकल गया सारा वक्त, कहां बचा कुछ बाकी है
मेरी नाकामयाबीयां बस मेरी ही है
मैं ही हूं जो की हंसता रहा, मुस्कुराता रहा
यह कह के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
Category: Poems
ना जा चन्ना
वे ना जा चन्ना तू परदेस हा
वे अपने वरगा ना कोई देस हा
वे मेरी मां ने वाजा मैनू सी मारिया
वे रोंदी रई सी वेख की पुत मेरा जा रिहा
पर मेरी ता मत मर सी चुकी
दिल दी एह ख्वाहिश ना रुकी
ते मैं परदेस आ गया
वे अपने वरगा ना कोई देस हा
वे मेरी मां ने वाजा मैनू सी मारिया
वे रोंदी रई सी वेख की पुत मेरा जा रिहा
पर मेरी ता मत मर सी चुकी
दिल दी एह ख्वाहिश ना रुकी
ते मैं परदेस आ गया
हुण एथे बुरबुर रोना है
वे जागदा ना सोना है
वे अपने याद बड़ा आऊंदे ने
फेर मन दिल बड़ा पछतौंदे ने
की मैं क्यों परदेस आ गया
मैनु कोई घर पहुंचा दवो
मेरे घर दा रास्ता दिखा दवो
वे वाज़ा हुण मैं मारा वे
वे ज़िन्दगी हुण हारा वे
ते दिल विच हुण मैं सोचदा
की मैं क्यों परदेस आ गया

