मन की सफ़ेद चादर पर

मन की सफ़ेद चादर पर
जो पड़ गए है निशान
वोह आंसु भी ना धो पाएंगे

रिश्तों के इस समुन्द्र में
जो आ गए है तूफ़ान
वोह सब मिटा कर जायेंगे

मन की सफ़ेद चादर पर….

मन पर विचारों के पहाड़ है
नर्म मिट्टी पर, डाला कितना भार है
फटने को है कलेजा बस
अब और सह नहीं पाएंगे

मन की सफ़ेद चादर पर….

उम्रदराज़ होते, तो मौत का इंतजार होता
कुछ पल हंसी के जीने को, मन ना बेकरार होता
पर भरी जवानी में, मौत को कैसे गले लगाएंगे

मन की सफ़ेद चादर पर….

ऐ ख़ुदा अब हिम्मत दे
कितने ही किए है कर्म, एक इमदाद और कर दे
कारण बना दे मेरे जाने का, ख़ुद ही ख़ुद को ना मिटा पाएंगे

मन की सफ़ेद चादर पर….

08.08.2013

चंद लम्हों की उम्मीद

चंद लम्हों की उम्मीद है मुझको
बाकी सब थोड़ा है

ज़माना पूछ रहा है मुझसे
की मैंने क्यों सब छोड़ा है

अपना ठिकाना है हवां सा
मगन गगन में घुमु

फूलों की पंखुड़ियां छेड़ू
और तितलियों के परों को चुमु

इतना दुख देखा है मैंने
की अब दुख भी मुझसे भागे

अब इत्मीनान से चलता हूं मैं
नहीं परवाह क्या है आगे

बस अब इक ही चाहना है बाकी
इक ही बाकी तमन्ना

की ज़िन्दगी तो फूलों से हो गई
पर मौत से कैसे संभालना

अभी मेरा मरना है बाकी
और जैसे दीयो की बाती, सब जलती है बुझने को

कितना भी लंबा सफर ही साकी
सब चलते है रुकने को

चलना ही ज़िन्दगी की है आदत
चलना ही है जीना

मौत गर कहीं दिख भी जाए
सामने कर देना अपना सीना

मस्ती में चलना और हर पल खिलना
अब आदत है मेरी

बैठा हूं त्यार मैं अब तो
मौत की तरफ से है देरी ।

25.12.2012