शायद मैंने पी है

सर्द हवाओं ने बताया की मैंने पी है
उस की आँखों ने दिखाया की मैंने पी है

शायद मैंने पी है

इस पल में इतना मज़ा है के साकी
की सारी ज़िन्दगी इसके आगे फिक्की है

शायद मैंने पी है

यह नशा जाम-ए-शराब का नहीं, मेरे मेहबूब की मोहब्बत का है
जिसने एक नज़र में ज़िन्दगी जवाँ कर दी है

शायद मैंने पी है

अब नशा उसके दीदार का ऐसा है मूझे
लगता है की सारी दुनिया मैंने मुठी में की है

शायद मैंने पी है

दुनिया ने हमें सब सिखाया

दुनिया ने हमें सब सिखाया, पर मरना नहीं
ज़िन्दगी लंबी लगती है मगर, इसका ऐतबार करना नहीं

चंद लम्हों में ही सिमट कर खो जाती है
सांसों की लड़ी देखते ही देखते बंद हो जाती है

मरना तो किसी की ख्वाहिश नहीं है, फिर क्यूं मौत आती है
ज़िन्दगी आंखें नम कर लेती है, पर मौत को ना रोक पाती है

रह रह कर मन मेरा मुझसे पूछता है, की क्या मुझे भी मरना होगा
मैं भी जलूंगा कभी, क्या लकड़ियों का इंतज़ाम करना होगा

मुझे समझ नहीं आता कि अपने मन से क्या कहूं
शायद मैं और मेरा मन हम दोनों ही सच जानते है, पर इसे अनदेखा कैसे करू।