शुभ लाभ ही होगा

तुम्हारे पहले क़दमों का स्वागत है
शुभ लाभ ही होगा

तुम्हारे आने पर सारा ब्रह्माण्ड पुष्प वर्षा कर रहा है
मेरा भंडार ख़ुद कुबेर आकर भर रहा है

जब इतना सुन्दर आगाज़ है तो अंजाम कैसा होगा
शुभ लाभ ही होगा

मूर्ति पुज के राम मिले तो

मूर्ति पुज के राम मिले तो, मै पुजू पहाड़

राम तेरा तेरे भीतर छुपा है, उसको ले पहचान

तुझ पर कृपा करता है वोह, कितना दीन दयाल

दुख में जब सब छोड़ के जाते, वोह रहता तेरे पास

सुख दुख में वोह साथ है तेरे, रख उस पर ही आस

दुख मैं भी तू निडर रहना, ना सुख की करना आस

राम का रिश्ता तुझ से वैसा, जैसे पानी संग है प्यास

बाहर की आंखें बंद कर ले, भीतर आंखें खोल

भीतर समाए राम के, संग संग तू डोल

फिर तू समझ जाएगा प्यारे, कहां राम का वास

मूर्ति पुज के राम मिले तो, मै पुजू पहाड़ ।