अगर कोई खुश है तोह वोह
क्या और खुश होना चाहेगा।
अगर हाँ तो कितनी और
ख़ुशी से उसका मन भर जाएगा।
ता उम्र भाग के देख लिया
मन तोह मेरा भरता नहीं।
जितना भी मिल जाये इसे
यह कभी उतने में सब्र करता नहीं।
क्या यही ज़िन्दगी का मकसद है
या कुछ और भी पाना है।
या सच में कोई मकसद नहीं है
सिर्फ ख़ुशी ढूंढना ही बस एक बहाना है।।

