मन की सफ़ेद चादर पर

मन की सफ़ेद चादर पर
जो पड़ गए है निशान
वोह आंसु भी ना धो पाएंगे

रिश्तों के इस समुन्द्र में
जो आ गए है तूफ़ान
वोह सब मिटा कर जायेंगे

मन की सफ़ेद चादर पर….

मन पर विचारों के पहाड़ है
नर्म मिट्टी पर, डाला कितना भार है
फटने को है कलेजा बस
अब और सह नहीं पाएंगे

मन की सफ़ेद चादर पर….

उम्रदराज़ होते, तो मौत का इंतजार होता
कुछ पल हंसी के जीने को, मन ना बेकरार होता
पर भरी जवानी में, मौत को कैसे गले लगाएंगे

मन की सफ़ेद चादर पर….

ऐ ख़ुदा अब हिम्मत दे
कितने ही किए है कर्म, एक इमदाद और कर दे
कारण बना दे मेरे जाने का, ख़ुद ही ख़ुद को ना मिटा पाएंगे

मन की सफ़ेद चादर पर….

08.08.2013

मां थक गया चलते चलते

मां थक गया चलते चलते
मैं इन पथराई हुई सी रहो में

थामो अब मुझको बाहों में

उस गोद का सहारा दो
जिस गोद में हम खेले है

दिल से लगा को बेटे को
अरसे से हम अकेले है

अब आंसू भी है सूख चुके
तेरी यादों में बहते बहते

पत्थर से मां हम बन है गए
तेरे बिन कहीं और रहते रहते

इस पत्थर को कोमल कर दो
मां तुम अपने दुलार से

मां छू दो तुम मेरे दिल को
भर जाए जीवन प्यार से

मां जल्दी करो, ना देर करो
दम निकल ना जाए इन्हीं आहों में

थामो अब मुझको बाहों में

थामो अब मुझको बाहों में