मेरी नाकामयाबीयां बस मेरी ही है
मैं ही हूं जो की हंसता रहा, मुस्कुराता रहा
यह कह के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
जो भी यह बिखरी चीजे है, यह सब मेरी है
मैं ही था जो बेपरवाह होकर इनको गिरता गया
यह सोच के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
मैं अपने आप को कहता रहा की संभलना क्यों है
थोड़ी देर और इसी नशे में रहने दो खुद को
क्योंकि अभी तो वक्त बहुत बाकी है
मुझे सच में यकीन था कि बहुत वक्त है पास मेरे
उन कीमती पलो के सिक्के को मैं लुटाता गया
यह सोच के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
आज मेरे हाथों मैं वक्त की लकीरे हैं और कुछ भी नही
सब आगे बड़ गए, मेरे पास खड़ा कोई भी नहीं
अब लगता है की निकल गया सारा वक्त, कहां बचा कुछ बाकी है
मेरी नाकामयाबीयां बस मेरी ही है
मैं ही हूं जो की हंसता रहा, मुस्कुराता रहा
यह कह के, की अभी तो वक्त बहुत बाकी है
Category: Poems
तेरे आने को दाता
तेरे आने को दाता
हवा ने बात चलाई है
बरखा ने धरती को धोया है
फूलों ने पगडंडी बनाई है
हवा ने बात चलाई है
बरखा ने धरती को धोया है
फूलों ने पगडंडी बनाई है
मां लक्ष्मी ने बल बुद्धि विद्या दे के
मन मंदिर में ज्योति जगाई है
जिभा देहली भी रामा
तेरे ओहो गाद से सजाई है
हर दिए को कहा है दाता
हर दिए को बात बताई है
उनके बुझने से पहले आयोगे तुम
यह उनसे शर्त लगाई है
सारी दुनिया देखने आ रही
की यह रोशनी कहां जगमगाई है
आज मिलने की घड़ी आई है
सांसों में बजी शहनाई है
दाता पग धरो, कृपा करो
दाता पग धरो, कृपा करो
तेरे राज़ तिलक की रामा
शुभ घड़ी आज आई है
सांसों में बजी शहनाई है। – 2

