मिल जाने को

क्यों है इतना इंतजार रे प्यारे
मेरा जो है, मिल जाने को

घर की दहलीज़ पर खड़े हम है
पर हाथ नहीं दरवाज़ा खटखटाने को

आवाज़ लगा रहा हुं कब से
और कितना वक़्त लगेगा तेरे बाहर आने को

सूनी अनसुनी मत कर प्यारे
मेरे पास कोई और नहीं है दर जाने को

कोई रस नहीं बचा पास है मेरे
एक प्रेम रस है मनाने को

अब तो आ कर मुझे मिल जा ठाकुर
कोई ढंग ना बचा रिझाने को

तू मिले तो सुलझे यह जीवन
पंडित, पोथी तो है उलझाने को

क्यों है इतना इंतजार रे प्यारे
मेरा जो है, मिल जाने को

ऐ ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगी तु इतनी हसीन कब थी, जितनी अब है
कुछ भी नहीं बचा मेरे पास, पर लगता है कि सब है

तेरी अदायों का मोल, मैंने अब जाना
मैं कौन था और क्या हूं, खुद को पहचाना

समय अब मुझे डराता नहीं है
चंद घड़ियां ही बची है, यह कह के सताता नहीं है

असल आज़ादी मैंने अब महसूस की है
जो कभी ना उतरे वोह शराब आज पी है

अब इस खुमारी में मुझे जी लेने दो यारों
यहां गम का कतरा भी नहीं है, बस खुशियां है हज़ारों

मैं आज़ाद हूं, और गवाह मेरे रब है
ऐ ज़िन्दगी तु इतनी हसीन कब थी, जितनी अब है।