काली रात तो बाद स्वेर

छड़ ओह कमलेया विशाला
जग दे सारे फेर

किस पासे दिया करिए
जद सारे पासे हनेर

जे कोई इस चो निकल लेया
ता उस मालिक दी मेहर

मन ना होला कर वे चंदरेया
आऊगी काली रात तो बाद स्वेर।

15.12.2012

तुम्हारी औकात नहीं है

तुम्हारी औकात नहीं है

मुझसे आंख मिलनी की
मेरे रूबरू हो जाने की

तुम्हारी औकात नहीं है

तुम्हारी कारस्तानी चेहरे पे लिखी है
लगता नहीं है, की तुम्हारी रूह पहली बार बिकी है

ना कहो कि तुम्हारा इरादा सही है
जो पहले भी की थी, यह गलती वही है

अब करने को बची, कोई बात नहीं है

तुम्हारी औकात नहीं है