कोई गिला नहीं

ना ही कोई गिला है मुझे, ना ही कोई शिकायत है
बस कट रही है यह ज़िन्दगी, तेरी ही इनायत है

तेरा ही तो दिया सब कुछ है, तुझ पे ही सब कुर्बान है
मां बाप की उधारी यह शरीर है, और तेरी उधारी यह जान है

कुछ अपना नहीं, कुछ पराया नहीं
कुछ मैंने खोया नहीं, और कुछ नया पाया नहीं

मैं हर धड़ी ही पूरा था, मैं हर घड़ी ही पूर्ण हूं
मैं हर घड़ी ही तु था, तु होकर ही सम्पूर्ण हूं।

मिल जाने को

क्यों है इतना इंतजार रे प्यारे
मेरा जो है, मिल जाने को

घर की दहलीज़ पर खड़े हम है
पर हाथ नहीं दरवाज़ा खटखटाने को

आवाज़ लगा रहा हुं कब से
और कितना वक़्त लगेगा तेरे बाहर आने को

सूनी अनसुनी मत कर प्यारे
मेरे पास कोई और नहीं है दर जाने को

कोई रस नहीं बचा पास है मेरे
एक प्रेम रस है मनाने को

अब तो आ कर मुझे मिल जा ठाकुर
कोई ढंग ना बचा रिझाने को

तू मिले तो सुलझे यह जीवन
पंडित, पोथी तो है उलझाने को

क्यों है इतना इंतजार रे प्यारे
मेरा जो है, मिल जाने को