क्या है ज़िन्दगी

बेमतलबी पन्नों पर, बेमतलबी शब्दों की कतारों का नाम ज़िन्दगी है

मैं को बचाने के लिए, खड़ी करी दीवारों का नाम ज़िन्दगी है

असल क्या है, यह तोह नहीं पता ऐ विशाल

पर लगता है, कि इकठ्ठे किए हुए विचारों का नाम ज़िन्दगी है।

जाना होगा

ना चाहते हुए भी जाना होगा
हर सांस यही बताती है

बर्फ़ की तरह स्तब्ध हो जाता हुं
जब यह बात मन तक पहुंच जाती है

मन व्याकुल हो उठता है
आंखें सो सो आंसु बहाती है

सब सामने बैठे है मेरे
फिर भी सबकी याद बहुत रूलाती है।