मां तुमसे किया हर वादा

सपने, उम्मीदे, वादे, मैं पूरे कर दिखाऊंगा
मां तुमसे किया हर वादा, मैं जरूर निभाऊंगा

आशाएं जीवन की चाहे, रोशनी ना दे मुझे
उस अंधेरे में मैं मां, तेरे ज्ञान कि मशाल जलाऊंगा

मां तुमसे किया हर वादा, मैं जरूर निभाऊंगा

राहें चाहे भर ले अपने आप को कांटो से
तेरे प्यार के सुमन, मैं उन पर बिछाऊंगा

मां तुमसे किया हर वादा, मैं जरूर निभाऊंगा

बादल गरजे, बिजली चमके या बरसे बरसात
तेरे आशीर्वाद की ताकत से मैं, आगे बढ़ता जाऊंगा

मां तुमसे किया हर वादा, मैं जरूर निभाऊंगा

पर एक ही कसक है दिल में, जो कांटो सी चुभती है
की इस एक जीवन में मैं मां, तेरा कर्ज़ कैसे चुकाऊंगा

मां तुमसे किया हर वादा, मैं जरूर निभाऊंगा।

मन की पर्ते

मन की पर्ते खोली तो उनमें दुर्गन्ध ही दुर्गन्ध थी
कहीं राग की, कहीं द्वेष की, कहीं काम की, कहीं क्लेश की

भाग उठा मन वहां से, कहता कि अब और नहीं
यह कैसी लत लगी है मुझे, जिसकी तलब पे मेरा कोई ज़ोर नहीं

लाचार हूं, कि कोई बचा दे मुझे
परेशान हूं, की कोई हटा दे मुझे

पर भिखारियों की इस दुनिया में दाताकार कोई और नहीं
सब फंसे है इस दलदल में और मददगार कोई और नहीं

आंसूओं से समुद्र भर दिया, पर तारणहार कोई और नहीं
चाहे गलती की है मैंने अनजाने में, पर बख्शनहार कोई और नहीं

जब सब करने वाला मन है मेरा, तब करावनहार कोई और नहीं
खुद ही खुद को समझ ले प्यारे, समझावनहार यहां कोई और नहीं।

5.01.2013