रे ओ श्यामा

रे ओ श्यामा, रेे ओ प्यारे
ना जाने कब मिल होगा
पुकारते है हम चारों पहर
ना जाने कब तेरा दिल होगा

शिकायत मैं नहीं करता
बहाने तुम बनाते हो
कभी किस्मत, कभी बन्धन
कर्मो का बताते हो

अगर तुम ज़िद के पक्के हो
तो कम हम भी है कहां
धरा पर मिल ना पाए गर
तो मिलने आएंगे तू जहां

शुभ लाभ ही होगा

तुम्हारे पहले क़दमों का स्वागत है
शुभ लाभ ही होगा

तुम्हारे आने पर सारा ब्रह्माण्ड पुष्प वर्षा कर रहा है
मेरा भंडार ख़ुद कुबेर आकर भर रहा है

जब इतना सुन्दर आगाज़ है तो अंजाम कैसा होगा
शुभ लाभ ही होगा