अगर कोई खुश है तोह वोह
क्या और खुश होना चाहेगा।
अगर हाँ तो कितनी और
ख़ुशी से उसका मन भर जाएगा।
ता उम्र भाग के देख लिया
मन तोह मेरा भरता नहीं।
जितना भी मिल जाये इसे
यह कभी उतने में सब्र करता नहीं।
क्या यही ज़िन्दगी का मकसद है
या कुछ और भी पाना है।
या सच में कोई मकसद नहीं है
सिर्फ ख़ुशी ढूंढना ही बस एक बहाना है।।
Category: Poems
मसला
कुछ डरा सा हूं, कुछ होंसला भी है
क्या महसूस करू, मसला यही है
कुछ दूर से मुझे कुछ, दिख तो रहा है
क्या वोह सच में है सूरज, या कोई टॉर्च जली है
कैसे बताऊं, मसला यही है
मैं डरता नहीं हूं, खुद को बहुत बार बोला
आखिर डर छुपता कहां है, कोना कोना खंगोला
है भी और मिलता नहीं है, मसला यही है
समय उसी और भागा है जाए
कैसे रोकू इसे, क्या करू उपाय
रेस तोह है मगर ब्रेक नहीं है, मसला यही है

