क्या है ज़िन्दगी

बेमतलबी पन्नों पर, बेमतलबी शब्दों की कतारों का नाम ज़िन्दगी है

मैं को बचाने के लिए, खड़ी करी दीवारों का नाम ज़िन्दगी है

असल क्या है, यह तोह नहीं पता ऐ विशाल

पर लगता है, कि इकठ्ठे किए हुए विचारों का नाम ज़िन्दगी है।

यूं बूत बने बैठे ना रहो

आज देश लूटा है, कल घर लूटेगा तुम्हारा
जागो, उठो, सामना करो
यूं बूत बने बैठे ना रहो

चंद लोगों के ही हाथ में कमान है
उनके राज़ में हर कोई परेशान है
भविष्य की अपनी कमान, अपने हाथ में तो करो

जागो, उठो, सामना करो
यूं बूत बने बैठे ना रहो

अमीर की अमीरी और गरीब की गरीबी, दोनों का ही विस्तार है
और संसद में बैठा नेता इस सब के लिए जिम्मेदार है,
अपने आने वाले कल की फिक्र तो करो

जागो, उठो, सामना करो
यूं बूत बने बैठे ना रहो

आयो उतरे सड़कों पर, और मांगे हक हकीक़त में
एक और भी सांस ना लेना, दुश्वार हुई इस दिक्कत में
बदलाव का अब तुम साथियों, इंतजार ना करो

जागो, उठो, सामना करो
यूं बूत बने बैठे ना रहो