हम है आज़ाद परिंदे

हर गम से तु
मज़बूरी से
आज़ादी दे

ओ मौला
मुझे आज़ाद
कर दे

मेरे पंखों को
खुलने की
जगह दे

इतनी की
सूरज को भी
हम छुपा दे

ओ मौला
मुझे आज़ाद
कर दे

कुछ पाने कि
हर ख्वाहिश ही
फ़ना कर दे

तेरे इश्क़ की
चाहत से ही
मुझे भर दे

ओ मौला
मुझे आज़ाद
कर दे

मेरे कन कन को
आज़ादी से
ऐसे भर दे

की सांस-सांस मेरी बोले
हम है
आज़ाद परिंदे

हम है
आज़ाद परिंदे

मक़सद-ए-मगरूर

वोह मक़सद-ए-मगरूर है
अल्लाह से कितना दूर है

वोह नादान है, नापाक है
घरों में पलते सांप है
मुर्शद मुरीद की मौत पर
कहते की मिलती हूर है

वोह मक़सद-ए-मगरूर है
अल्लाह से कितना दूर है

इंसाफ कर, हिसाब कर
इंसाफ कर, मौला आज कर
यह कयामत का क्या दस्तूर है

वोह मक़सद-ए-मगरूर है
अल्लाह से कितना दूर है

मौला ज़िन्दगी, पर सकून नहीं
मौला मस्जिदें, पर तु नहीं
यह कैसी अंधेरी रात है
जो हर इंसान नशे में चूर है

वोह मक़सद-ए-मगरूर है
अल्लाह से कितना दूर है