शहर की आबादी

मेरे शहर की आबादी बड़ गई है
सड़को पे लोगो की आवाजाही बड़ गई है

सड़के, दुकानें, गालियां और घर
सब भीड़ से भर गए है

छोटे छोटे मकानों में कबूतरों की तरह रहने लगे है लोग
बड़े मकान में रहने के जो थे सपने, वोह जेहन से उतर गए है

पहले दो तीयाही जी कर और एक तियाही ज़िन्दगी सो कर गुजरती थी
अब एक तियाहि से ज्यादा तोह सड़क पे गुजर जाती है, जीने और सोने का तोह पूछो ही मत

सड़क को ही अब मैं अपना घर मानता हूं
उससे घर पर ना होने कि तकलीफ कम है

क्यूंकि इतने लोग होने के बावजूद भी, जितने फासले दिलो के है
उनसे तोह अभी सड़को के फासले कम है।।

काली रात तो बाद स्वेर

छड़ ओह कमलेया विशाला
जग दे सारे फेर

किस पासे दिया करिए
जद सारे पासे हनेर

जे कोई इस चो निकल लेया
ता उस मालिक दी मेहर

मन ना होला कर वे चंदरेया
आऊगी काली रात तो बाद स्वेर।

15.12.2012