हम मौत को गले लगा लेंगे

जब भी सहमा या डरा
छुप गया तेरे आंचल की छायों में

आज फिर ज़िन्दगी की गर्मी बड़ी है
मौत हाथों में हथियार लिए खड़ी है

आज फिर याद आता है, तुम्हारा आंचल मुझे
बर्फ़ की खामोशी में, पहाड़ों की जड़ता में

कहीं से तुम वही आंचल फिर से लेहरा दो
तो हम मौत को गले लगा लेंगे

सोचेंगे की
जीते जीते तो पा ना सके, हम मर कर तुम को पा लेंगे

हम मौत को गले लगा लेंगे।

सिक्कों की शांति

सारे विश्व की आवाम, एक ही बात जानती है
की नोटों की गड्डियों में ही शांति है

जितने हो उतने कम है
इनसे ही मिटते सब गम है

सब सुखों का कारण है यह
आनंद का उदहारण है यह

मुझे भी यही सिखाया था
बचपन से यही पढ़ाया था

इसीलिए

कमाने के लिए, हाथों में पकड़े कटोरे थे
बड़ी मेहनत से, चंद सिक्के मैंने बटोरे थे

पर सिक्कों ने जो वादा किया था, वोह सुख दिया नहीं
और मन ने सोचा, कि शायद अभी माकूल सिक्कों को इकठ्ठा किया नहीं

मन की तृष्णा क्यों यह मानती नहीं
की दुनिया भर के सिक्कों में भी शांति नहीं

गलती हमारी नहीं दरअसल, सिखाने वालों ने हमें गलत ही सिखाया
सिक्के ही सुख का कारण है, यही बतलाया

मैं तो जान गया हूं अब, पर ना जाने यह आवाम कब यह समझ पाएगी
की जीवन की सच्चाई, इन सिक्कों की पकड़ में कभी नहीं आएगी।

04.10.2012