पाकीज़ा

पाकीज़ा, यह बात कैसी है
तेरी चौखट पर ही आते है

हुस्न वाले तो और भी है बाज़ार में
दुनिया भर के हुस्न में हम अक्स तेरा ही पाते है

पाकीज़ा, यह बात कैसी है
तेरी चौखट पर ही आते है

अगर तुम हुस्न लुटाती हो
तो हम भी झोली लुटाते है

पाकीज़ा, यह बात कैसी है
तेरी चौखट पर ही आते है

हाथों से पिलाती नहीं, दिल-ए-जा़म बनती हो
कुछ ही चुस्कियों में हम, मदहोश हो जाते है

पाकीज़ा, यह बात कैसी है
तेरी चौखट पर ही आते है

यूं बूत बने बैठे ना रहो

आज देश लूटा है, कल घर लूटेगा तुम्हारा
जागो, उठो, सामना करो
यूं बूत बने बैठे ना रहो

चंद लोगों के ही हाथ में कमान है
उनके राज़ में हर कोई परेशान है
भविष्य की अपनी कमान, अपने हाथ में तो करो

जागो, उठो, सामना करो
यूं बूत बने बैठे ना रहो

अमीर की अमीरी और गरीब की गरीबी, दोनों का ही विस्तार है
और संसद में बैठा नेता इस सब के लिए जिम्मेदार है,
अपने आने वाले कल की फिक्र तो करो

जागो, उठो, सामना करो
यूं बूत बने बैठे ना रहो

आयो उतरे सड़कों पर, और मांगे हक हकीक़त में
एक और भी सांस ना लेना, दुश्वार हुई इस दिक्कत में
बदलाव का अब तुम साथियों, इंतजार ना करो

जागो, उठो, सामना करो
यूं बूत बने बैठे ना रहो